तिरुपति बालाजी मंदिर - Tirupati Bala ji Temple
वेंकटाद्रि समस्थानं ब्रह्माण्डे नास्ति किञ्चन। वेंकटेश
समोदेवो न भूतो न भविष्यति।
( वेंकटाद्री के
समान पवित्र स्थान इस ब्रह्माण्ड में और कहीं नहीं है। श्री वेंकटेश्वर जी
(बालाजी) के समान देवता इससे पहले न कभी कोई था और न ही होगा।)
पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा कि श्री मल्लिकार्जुन ज्योर्तिलिंग के दर्शन के बाद
हम बस से करनूल पहुँच गए, जहाँ से रात को 9:50 की ट्रेन से तिरुपति के लिए रवाना हो गए । सारे
दिन की भाग दौड़ से हम काफी थके हुए थे इसलिए अपनी बर्थ पर लेटते ही गहरी नींद आ
गयी। अगले दिन सुबह ट्रेन अपने तय समय 6:40 से काफी पहले ही तिरुपति स्टेशन पर पहुँच गयी । तिरुपति स्तिथ अपनी कंपनी के
गेस्ट हाउस में हमारी आज के लिए पहले से ही बुकिंग थी। वहाँ फोन कर वहाँ की लोकेशन
ले ली और रेलवे स्टेशन से बाहर आकर एक ऑटो रिक्शा से गेस्ट हाउस चले गए । गेस्ट
हाउस ज्यादा दूर नहीं था , वहाँ पहुँचने में
10 मिनट भी नहीं लगे। वहाँ
पहुँचकर बिना समय गवाएँ ,नहा-धोकर जल्दी
से तैयार हो गए और नाश्ता करने के बाद, एक छोटे बैग को छोड़कर सारा सामान वहीँ रख दिया और फिर ऑटो रिक्शा से सेंट्रल
बस स्टैंड चले गए ।
