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Friday, 9 February 2018

Uttrakhand Yatra :Anusuya Devi Temple

रुद्रनाथ यात्रा : अनसूया माता मंदिर से मंडल

कंडिया बुग्याल में खाने पीने में ही 40-45 मिनट लग गए; इस समय शाम के 6:30 हो चुके थे और हल्का अंधेरा होना शुरू हो गया था। छानी वाले की इच्छा थी की हम रात को उसके पास ही रुक जाएँ। हमने आपस में विचार विमर्श किया तो सभी की सलाह थी कि आगे चलते हैं, बाबा जी भी पहले से ही तैयार थे। बस फिर क्या था सबने अपने अपने बैग उठाएं और अनसूया मंदिर की तरफ चल दिए। कंडिया बुग्याल (2346 मीटर) से अमृत गंगा नदी (2020 मीटर) तक नीचे 2 किलोमीटर की तीखी उतराई है।

अमृत गंगा

Monday, 5 February 2018

Rudranath Yatra : Rudranath Temple to Kandiya Bugyal


रुद्रनाथ यात्रा : रुद्रनाथ से कंडिया बुग्याल


रुद्रनाथ मंदिर (3590 मीटर) में भगवान शंकर के एकानन रूप में यानि मुख की पूजा की जाती है, जबकि पंचानन रूप में संपूर्ण शरीर की पूजा नेपाल की राजधानी काठमांडू के पशुपतिनाथ में की जाती है। यहाँ विशाल प्राकृतिक गुफा में बने मंदिर में शिव की दुर्लभ पाषाण मूर्ति है। यहाँ शिवजी गर्दन टेढे किए हुए हैं। मंदिर के अन्दर ही शिव-परिवार, सेषासन पर लेटे हुये विष्णु जी आदि कई दुर्लभ प्रतिमायें रखी हुई हैं। रुद्रनाथ के कपाट, परंपरा के अनुसार खुलते-बंद होते हैं। ठण्ड के मौसम में छह माह के लिए रुद्रनाथ जी गद्दी गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में लाई जाती है, जहां पर ठण्ड के मौसम के दौरान नीलकंठ महादेव जी की पूजा होती है।

माँ नंदा देवी 

Thursday, 1 February 2018

Rudranath Yatra : Panar to Rudranath Temple

                                       
रात को हम जल्दी सो गये थे तो सुबह आँख भी जल्दी खुल गयी, लेकिन बाहर ठण्ड बहुत थी तो इसीलिए चुपचाप रज़ाई में दुबके रहे । जिस जगह मैँ सोया हुआ था उसके पास ही एक खिड़की थी जिसके पल्लों के सुराख में से ठंडी हवा अंदर आ रही थी । उसी सुराख से बाहर पूरा अँधेरा भी दिख रहा था । मैं थोड़ी रोशनी के इंतजार में था ताकि उठकर बाहर बुग्याल में घूम सकूँ । लगभग 5:30 बजे जब बाहर हल्की रोशनी हो गयी तो मैं उठकर कमरे से बाहर आ गया ,बाकी अभी सब सो रहे थे । बाहर का दृश्य बड़ा मनमोहक था । कल शाम को बादल होने से हम कोई भी चोटी नही देख पाए थे लेकिन इस समय सभी चोटियाँ दिख रही थी। मैँ दोबारा कमरे में गया और अपना कैमरा उठा लाया लेकिन अभी रोशनी पर्याप्त न होने के कारण फ़ोटो साफ नही आ रही थी ।

गोल्डन चौखम्बा

Monday, 29 January 2018

Rudranath Yatra : Pung Bugyal to Panar Bugyal

रुद्रनाथ यात्रा : पुंग बुग्याल से पनार


पुंग बुग्याल (2285 मीटर ) में हम उम्मीद से पहले पहुँच गए । यहाँ आने में हमें दो घंटे से भी कम समय लगा । 9 बजे सगर(1700 मीटर) से चले थे ,15-20 मिनट चांद्कोट भी रुके और अब ठीक ग्यारह बजे हम पुंग बुग्याल में थे । पिछले दो घंटे में हम लगभग 600 मीटर ऊपर आ गए थे । पुंग बुग्याल में झोपडी नुमा एक दुकान है जहाँ खाने-पीने और रात रुकने की सुविधा भी है। स्थानीय भाषा में इसे छानी बोलते हैं । छानी का मालिक बाहर ही खड़ा था हमें देखकर बड़ा खुश हुआ और आव-भगत में लग गया। लम्बा चौड़ा मखमली घास का मैदान देखकर हम भी बाहर धुप में ही लेट गए । तब तक दुकान वाला पानी ले आया । सब ने पहले पानी पिया और फिर वह हमसे खाने के बारे में पूछने लगा । हमारी खाने की इच्छा नहीं थी फिर भी उसके आग्रह करने पर गौरव और आकाश ने अपने लिए मेगी बनवा ली। सुशील भी बोल उठा कि भाई जी,  हरी मिर्च है तो मेरी मैगी भी बना दो नहीं तो रहने दो ! लेकिन अफसोस हरी मिर्ची यहाँ भी नहीं मिलेगी। दोनों उदास ,सुशील हरी मिर्च न मिलने से ,दुकानदार एक मैग्गी का आर्डर कैंसिल होने से । थोड़ी ही देर में मैग्गी और चाय बन कर आ गई। गौरव और आकाश ने मैग्गी निपटाई फिर हम सब ने चाय। थोड़ी देर सुस्ताए और फिर आगे की लंबी यात्रा के लिए चलने को तैयार हो गए।

पनार बुग्याल ,देवता और छानी

Thursday, 25 January 2018

Rudranath Yatra : Chamoli to Pung Bugyal


रुद्रनाथ यात्रा : चमोली से पुंग बुग्याल

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा कि कल्पेशवर मंदिर के दर्शन के बाद हम चमोली की ओंर चल दिए और रास्ते में गरुड़ चट्टी में एक होटल में रात्रि विश्राम के लिए रुक गए। अब उससे आगे ...

अगले दिन सुबह 5 से पहले ही सब उठ गए । हमारे कमरे में एक ही  टॉयलेट था और तैयार सबको होना था तो कल सुबह की तरह यहाँ भी आसपास मुआयना किया तो पाया कि होटल के कई कमरे खुले थे और खाली भी थे ,बस फिर क्या था वहाँ भी कब्ज़ा कर लिया और जल्दी से सभी तैयार हो कर नीचे गाड़ी पर पहुँच गए । नीचे ढाबा अभी बंद था और हमे रात के खाने की पेमेंट करनी थी । मालिक की खोजबीन शुरू की लेकिन उसका मालूम ही नहीं था वो कहाँ सोया हुआ है , बिना पेमेंट दिए हम जाना नहीं चाहते थे , ढाबे के सामने ही एक चाय की दुकान थी जो इस दौरान खुल चुकी थी । वहां हमने चाय का आर्डर दिया ,जब तक चाय बनकर आती, ढाबे वाले का पता चल गया था ,उसे कमरे पर जाकर उठाया और रात के खाने के पैसे दिये । रात को ज्यादा पी लेने से वो उठ ही नही रहा था। चाय के साथ गुड डे बिस्कुट का सेवन कर हम चमोली की तरफ़ चल दिए ।