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Thursday, 16 May 2019

Manikaran - Himachal

मणिकर्ण- MANIKARAN
खीर गंगा ट्रैक  से वापिस बरशैणी पहुँचते-2 शाम के 6 बज चुके थे । आज 20 किलोमीटर से ज्यादा आना – जाना हो गया था इसलिए हम सभी काफी थके हुए थे। एक दुकान में हल्का खाना-पीना किया और फिर अपनी गाड़ी में सवार हो मणिकर्ण की तरफ़ चल दिए । 

श्रीरघुनाथ मंदिर, नैना भगवती मंदिर और श्री राम मंदिर एक साथ

Wednesday, 8 May 2019

Trek to Kheer Ganga


खीर गंगा ट्रैक, हिमाचल

नवम्बर-2018 में हिमाचल में शिकारी देवी और कमरुनाग ट्रैक पर जाने के बाद पिछले 4-5 महीनो में हिमालय जाने का कोई प्रोग्राम नहीं बन पाया। इस दौरान तीन यात्रायें तो हुई लेकिन सभी मैदानी इलाकों में ,इसीलिए फिर से हिमालय जाने की बड़ी इच्छा हो रही थी । काफी जगह दिमाग में आई जिसमे हिमाचल में चुडधार और करेरी लेक मुख्य थी ,लेकिन इस वर्ष ज्यादा बर्फ़बारी होने से इन जगह पर जाना अभी भी मुमकिन नहीं था। आख़िरकार हिमाचल के खीर गंगा ट्रैक पर चलने का फाइनल हुआ। मेरे साथ सुशील और सुखविंदर जाने वाले थे । इसी फरवरी में की गयी प्रयाग राज कुम्भ और अयोध्या यात्रा में भी ये दोनों साथ ही थे।  18 अप्रैल को सुबह निकलने का फाइनल किया और तय दिन सुबह 8:30 बजे हम तीनो अम्बाला से हिमाचल की ओर निकल पड़े।

खीरगंगा

Tuesday, 16 October 2018

Mata Baglamukhi Temple

माता बगलामुखी (Mata Baglamukhi Temple)
माता चामुण्डा देवी के मंदिर में दर्शन के बाद हम लोग बैजनाथ चले गए । मंदिर में दर्शनों के बाद रात्रि विश्राम वहीँ एक होटल में किया । सुबह उठकर दोबारा मंदिर में दर्शन के लिए चले गए और फिर वहां से दोबारा चामुंडा होते हुए सीधा धर्मशाला और फिर मैकडोनल्ड गंज पहुँच गए । वहाँ पर प्रसिद्ध बौद्ध मंदिर गए। बाबा बैजनाथ और मैकडोनल्ड गंज पर बाद में लिखूंगा , अभी नवरात्रे में आपको माता के अलग अलग सिद्ध स्थानों पर लेकर चलूँगा । 

धर्मशाला से वापसी में सीधा माता चिंतपूर्णी वाली सड़क पर चल दिए । ज्वाला जी मंदिर से कुछ किलोमीटर पहले रानीताल के पास से एक तिराहा है । इस तिराहे से एक सड़क दायीं और जा रही है जो सीधा माता चिंतपूर्णी को चली जाती है, इस जगह से कुछ किलोमीटर आगे मुख्य सड़क पर ही माँ बगलामुखी का बड़ा प्रसिद्ध मंदिर है। पहाड़ी इलाका होने के कारण मंदिर सड़क से नीचे है । सड़क पर मुख्य द्वार है यहाँ से नीचे सीडियां उतर कर ही मंदिर में जाया जाता है ।
 

Tuesday, 24 October 2017

Dharamshala - Mcleodganj

धर्मशाला - मैक्लोडगंज 

बैजनाथ मंदिर में पुनः दर्शन के बाद हम लोग नाश्ते की तलाश में मार्किट की तरफ़ गए लेकिन अभी तक यहाँ की मार्किट नही खुली थी इसलिए यहाँ से बिना नाश्ता किये ही धर्मशाला की तरफ चल दिये । धर्मशाला के लिए हमें पालमपुर होते हुए चामुंडा देवी तक जाना था जहाँ से धर्मशाला का रास्ता अलग हो जाता है । यानि कल रात हम जिस रास्ते से आये थे उसी रास्ते से हमें चामुंडा देवी तक वापिस जाकर  , वहां से कांगड़ा जाने वाले मार्ग को छोड़ कर धर्मशाला जाने वाली सड़क पर जाना था । बैजनाथ से चामुंडा देवी की दूरी 22 किलोमीटर है और सारा रास्ता पहाड़ी ही है। इस पूरे रास्ते मे धौलाधार के शानदार नज़ारे देखने को मिलते हैं । मशहूर हिल स्टेशन पालमपुर लगभग मध्य में पड़ता है। पालमपुर अपने चाय के बागानों के लिए मशहूर है । पालमपुर में हम सबने एक चाय के बागान से हरी पत्तियों की चाय खरीदी ।

Thursday, 12 October 2017

Baijnath Temple -Himachal Pardesh

बैजनाथ मंदिर- हिमाचल प्रदेश
माँ चामुंडा देवी के दर्शन के बाद मंदिर परिसर से बाहर आकर पहले सबने चाय पी । सुबह नाश्ते के बाद से हमने अभी तक चाय नही पी थी इसलिए चाय की तलब भी हो हो रही थी । चाय पीने के बाद पार्किंग से गाड़ी निकाल कर बैजनाथ की ओर चल दिए । अब तक साढ़े पांच बज चुके थे औऱ हल्का अंधेरा होने लगा था । चामुंडा से बैजनाथ तक सारा रास्ता पहाड़ी ही है और  मशहूर हिल स्टेशन पालमपुर से होकर जाता है । पालमपुर अपने चाय के बागानों के लिए मशहूर है । इस पूरे रास्ते मे धौलाधार के शानदार नज़ारे देखने को मिलते हैं । अब चूँकि अंधेरा हो चुका था इसलिए इस समय हम बर्फ़ीली चोटियाँ नही देख पा रहे थे ।


Friday, 29 September 2017

Mata Chintpurni Temple

माता चिन्तपूर्णी मंदिर- छिन्नमस्तिका देवी (Mata Chintpurni Temple)

बगुलामुखी मंदिर में दर्शन के बाद हम सीधा माता चिंतपूर्णी के मंदिर की ओर चल दिये । माता चिंतपूर्णी का मंदिर यहाँ से लगभग 35 किलोमीटर दूर है ।यही रोड आगे मुबारकपुर ,अम्ब होते हुए ऊना  और नंगल की तरफ चली जाती है । बगुलामुखी से चिंतपूर्णी जाते हुए रास्ते में ब्यास नदी भी मिलती है लेकिन उस समय सर्दी होने के कारण ब्यास नदी में पानी काफी कम था । ब्यास नदी का पुल लगभग मध्य में पड़ता है यानि इस पुल से बगलामुखी और माता चिंतपूर्णी के मंदिर लगभग बराबर दुरी पर ही होंगे ।

मन्दिर का गर्भ गृह 

Tuesday, 26 September 2017

Mata Chamunda Devi

चामुंडा देवी मंदिर (Mata Chamunda Devi Temple)

बृजेश्वरी देवी, काँगड़ा में दर्शन के बाद हम चामुंडा देवी मंदिर की ओर चल दिए । काँगड़ा से चामुण्डा देवी का मंदिर लगभग 25 किलोमीटर दूर है । सड़क अच्छी बनी है ,ट्रैफिक भी कम था तो गाड़ी तेजी से भागी जा रही थी । काँगड़ा से आगे चलने पर धौलाधार पर्वत माला दिखनी शुरू हो गयी और इसकी बर्फ से ढकी ऊँची चोटियाँ काफी मनोरम दृश्य पैदा कर रही थी।, हरि भरी वादियाँ और कल कल बहते झरने हमें अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे । बीच में दो या तीन जगह पठानकोट –जोगिन्दर नगर रेल मार्ग की छोटी लाइन भी मिलती है । कुल मिला कर इस यात्रा मार्ग में अनेंक मनमोहक दृश्य हैं , पहाडी सौन्दर्य का लुफ्त उठाते हुए हमें समय का मालूम ही नहीं चला और हम चामुण्डा देवी पहुंच गए ।

Monday, 25 September 2017

Mata Brijeshwari Devi Temple-Kangra

माँ बृजेश्वरी देवी - नगरकोट वाली माता (Mata Brijeshwari Devi Temple)

ज्वाला जी में माता के दर्शन के बाद हमने बिना समय गवाएं, जल्दी से पार्किंग से गाड़ी निकाली और काँगड़ा की तरफ़ चल दिए जहाँ हमने बृजेश्वरी देवी यानि काँगडे वाली माता के दर्शन करने थे । काँगड़ा यहाँ से ज्यादा दूर नहीं है, मात्र 35 किलोमीटर ही है। काँगड़ा तक सड़क भी अच्छी बनी है इसलिए हम लगभग एक घंटे से भी कम समय में वहां पहुँच गए। मंदिर के आसपास कहीं पार्किंग नज़र नहीं आई तो एक सामने ही एक गली में गाड़ी साइड में लगा दी, मतलब पचास रूपये बचा लिये। मंदिर जाने के लिये गलियों से गुज़र कर जाना पड़ता है । मुख्य सड़क से मंदिर दिखायी भी नहीं देता सिर्फ़ एक छोटा सा गेट बना है और सारा रास्ता तंग गलियों से होकर है । मंदिर तक पहुंचना एक भूल भुलैया जैसा ही है ।


Saturday, 23 September 2017

Maan Jwala ji Temple

ज्वालामुखी देवी (Jwala Devi Temple )

नैना देवी मंदिर में दर्शन के बाद बाहर आकर पार्किंग की तरफ चल दिए और वहीँ एक भोजनालय में अमृतसर के मशहूर छोले कुलचे खाए और फिर चाय पीकर आगे के सफ़र के लिये निकल लिये । यहीं से एक सड़क सीधे भाखड़ा बांध होते हुए नंगल-उना की तरफ चली जाती है । जब यहाँ से चलने लगे तब  स्वर्ण ने कहा कि मुझे बाबा बालक नाथ के मंदिर जाना है वो इधर कहीं पास ही है , गूगल पर चेक किया तब मालूम हुआ की वो स्थान यहाँ से लगभग 100 किमी दूर है लेकिन जिस रास्ते से हमें जाना है उससे केवल 16 किमी हटकर है । हमने सर्वमत से सबसे पहले वहीँ चलने का फ़ैसला किया । वैसे तो इन दोनों स्थानों में एरियल दुरी 20 किमी ही होगी लेकिन बीच में गोविंग सागर झील पड़ने से इसके किनारे –किनारे घूम कर आने से बहुत दूर पड़ता है । यहाँ से हमने अपनी गाड़ी नंगल-उना वाली सड़क पर दौड़ा दी और भाखड़ा बांध के आगे से होते हुए उना-हमीरपुर रोड पर पहुँच गए । इसी मार्ग पर बडसर नमक जगह से बाबा बालक नाथ के मंदिर का रास्ता अलग हो जाता है। इस जगह से मंदिर 16 किमी दूर है। इस यात्रा का जिक्र कभी बाद में करेंगे आज सिर्फ़ ज्वाला माता के मंदिर ही चलते हैं ।

माँ ज्वाला जी मंदिर

Friday, 22 September 2017

Maa Naina Devi Temple

नैना देवी मंदिर Temple
हिमाचल में पाँच देवियों की यात्रा , एक काफी प्रसिद्ध यात्रा सर्किट है । माँ नैना देवी से शुरू होकर ,माँ चिंतपूर्णी ,माँ ज्वाला जी, कांगडे वाली माता (बृजेश्वरी देवी) और माता चामुण्डा देवी । बहुत से टूर ओपेरटर भी इन देवियों के एक साथ दर्शन के लिये बस द्वारा यात्रा आयोजित करते रहते हैं। अम्बाला से तीन दिन में इन सभी स्थानों पर जाकर वापिस आया जा सकता है।

Saturday, 4 February 2017

Manimahesh Kailash Yatra- Part 2 -Pathankot-Chamba- Bharmour-Hadsar

मणि महेश कैलाश यात्रा-2 ( Manimahesh Yatra )

मणि महेश कैलाश यात्रा-2 ( पठानकोट-चम्बा-भरमौर–हडसर ) 

पठानकोट से चम्बा की दुरी लगभग 125  किलोमीटर है। लगभग पूरा रास्ता पहाड़ी है । बस में 160  रुपये की टिकेट लगी । टिकेट के पीछे दुरी 130  किलोमीटर लिखी थी । शायद बस का रूट कुछ अलग हो ,बाइपास वगैरह से । बस  धार कलां , भात्वान और बनीखेत होते हुए गयी । बनीखेत से ही दायें  तरफ डलहौजी की सडक कटती है । यहाँ से डलहौजी मात्र 8 किलोमीटर की दुरी पर है जबकि चम्बा 45 किलोमीटर दूर है । यहाँ तक खूब बारिश मिली, मौसम भी एकदम सुहावना बना हुआ था लेकिन मेरे लिए बस का सफ़र आरामदायक नहीं रहा , पुरे रास्ते खाली पेट होने से  और नींद के कारण परेशान रहा । पहाड़ी रास्ता होने के कारण जी अलग मिचलाने लगा । बैग में परांठे पैक किये हुए रखे थे लेकिन खाने की बिलकुल भी इच्छा नहीं थी । मालूम था अगर कुछ  भी खा लिया तो तुरंत मुंह से ही वापिस निकालना पड़ेगा । रास्ते में एक जगह चाय नाश्ते के लिए बस रुकी । यहाँ मैंने नीबूं सोडा ही लिया , इसके बाद मेरी तबियत में हल्का सा सुधार आया ।

हडसर से दिखता हिमालय 

Thursday, 22 September 2016

पराशर झील और बिजली महादेव यात्रा --पार्ट 2

लगभग पौने नौ बजे हम पराशर से अपनी अगली मंजिल बिजली महादेव की ओर चल दिए । कल जाते हुए तो अँधेरे के कारण सुन्दर दृश्य नहीं देख पाए थे लेकिन आज दिन के उजाले में चारो तरफ सुन्दरता ही नज़र आ रही थी । सड़क देवदार के घने जंगल से होकर है । जंगल इतना सघन है की इसके बहुत से हिस्से में नीचे धूप नहीं पहुँच पाती और इसी कारण से पेड़ों के तने काई से भरे हुए थे । शुरू के दस किलोमीटर का रास्ता काफ़ी ख़राब था इसीलिए हमारा ध्यान सड़क पर ज्यादा था । पहाड़ी इलाकों में चढ़ाई से उतराई हमेशा ज्यादा ख़तरनाक होती है । चढ़ाई के समय तो केवल बाइक का ज्यादा जोर लग रहा था लेकिन उतराई में बैलेंस की ज्यादा दिक्कत थी । दोनों बाइक के इंजन बंद थे फिर भी बाइक 30-40 की स्पीड से नीचे  भाग रही थी । हर 50-60 मीटर के बाद ही ख़तरनाक मोड़ आ जाता था जिसके कारण बड़ी सावधानी से बाइक चलानी पड़ रही थी । अधिक ढलान होने से दोनो ब्रेक मारने पर भी बाइक जल्दी नहीं रूकती । लगभग पौने घंटे में हमने वो घटिया रास्ता पार किया ।उससे आगे सड़क बिलकुल नयी बनी थी । आप इस रास्ते की तुलना उखीमठ से चोपता जाने वाले मार्ग से कर सकते हैं ....घना जंगल ,ढेर सारी हरियाली और काई से भरे पेड़ों के तने।
प्रवेश द्वार



Friday, 16 September 2016

पराशर झील और बिजली महादेव यात्रा --पार्ट 1


पराशर झील ( Prashar Lake )
पिछले सप्ताह अपने मित्रों अमित तिवारी , बीनू कुकरेती और अन्य साथियों के साथ उधमपुर में कैलाश कुंड जाने का मेरा प्रोग्राम बनते बनते रह गया । जिसकी भरपाई 4 दिन बाद ही हिमाचल में पराशर झील और बिजली महादेव की यात्रा से की गयी ।
इस यात्रा में मेरे साथ मेरे सहकर्मी एवम् दोस्त सुखविंदर सिंह भी तैयार हो गए । चूँकि ये दोनों स्थान मुख्य सड़क से हटकर हैं , इन तक जाने के लिए लोकल बस या जीप लेनी पड़ती । उससे बचने के लिए हमने बाइक से ही चलने का निर्णय ले लिया । मेरे पास 2004 मोडल TVS विक्टर है और सुखविंदर के पास दो महीने पहले ही नयी खरीदी हुई सुपर स्पेलंडर थी । मेरी ये दूसरी लम्बी बाइक यात्रा थी । पिछले साल अक्टूबर के पहले सप्ताह हम दोनों ने चोपता , तुंगनाथ ,देवरिया ताल की यात्रा बाइक से की थी ।
पराशर झील