Wednesday, 24 October 2018

Gujrat Yatra : Somnath Jyotirling Temple

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर  ( Somnath Jyotirling Temple )

पिछली पोस्ट में आप पढ़ चुके हैं कि नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद हम गोपी तालाब और भेट द्वारका गए ।वहाँ से दोपहर तक वापिस द्वारका लौट आये और शाम को द्वारका के स्थानीय मंदिरों में दर्शन किये और फिर रात की ट्रेन से सोमनाथ के लिए रवाना हो गए। अब उससे आगे ....

द्वारका से सोमनाथ के लिए एक ही ट्रेन है जो द्वारका से रात 8:30 चल कर अगले दिन सुबह 5:00 बजे सोमनाथ पहुँच जाती है । सोमनाथ इस रूट पर आखिरी रेलवे स्टेशन है । हमारी ट्रेन समय से पहले ही सोमनाथ पहुँच गयी थी । बाहर अभी दिन का उजाला नहीं हुआ था, थोडा अँधेरा ही था । वैसे भी भारत के धुर पश्चिमी किनारे पर होने के कारण यहाँ सूर्योदय लेट ही होता है । सोमनाथ स्टेशन के पूरे प्लेटफ़ॉर्म पर मछली से भरे हुए बड़े बड़े डिब्बे पड़े हुए थे । जिसके कारण रेलवे स्टेशन पर मछली की जबरदस्त दुर्गंध थी। हम जल्दी से स्टेशन से बाहर निकले और हमें कई गेस्ट हाउस वालों ने ‘कमरा चाहिए –कमरा चाहिए ‘ कहते हुए घेर लिया। बड़ी मुश्किल से उनसे पीछा छुड़ाया । एक पंडित जी भी अपनी बाइक पर घूमते हुए अपना कमरा देने के लिए ग्राहक खोज रहे थे, अब वो चिपक गए । बोले कमरा देख लो ,पसंद आये तो लेना , नहीं तो मत लेना । हमने एक रिक्सा किया और उस पंडित के पीछे पीछे उसके घर पहुँच गए । उसने अपने घर के ही दो कमरे यात्रियों के लिए छोड़े हुए थे । कमरा ठीक ठाक था । ज्यादा अच्छा भी नहीं और बुरा भी नहीं । कमरा मंदिर के काफी नजदीक था और हमें शाम तक ही चाहिए था इसलिए हमने वही पसंद कर लिया। किराया भी शायद 400 रूपये था ।

सोमनाथ मंदिर

Tuesday, 16 October 2018

Mata Baglamukhi Temple

माता बगलामुखी (Mata Baglamukhi Temple)
माता चामुण्डा देवी के मंदिर में दर्शन के बाद हम लोग बैजनाथ चले गए । मंदिर में दर्शनों के बाद रात्रि विश्राम वहीँ एक होटल में किया । सुबह उठकर दोबारा मंदिर में दर्शन के लिए चले गए और फिर वहां से दोबारा चामुंडा होते हुए सीधा धर्मशाला और फिर मैकडोनल्ड गंज पहुँच गए । वहाँ पर प्रसिद्ध बौद्ध मंदिर गए। बाबा बैजनाथ और मैकडोनल्ड गंज पर बाद में लिखूंगा , अभी नवरात्रे में आपको माता के अलग अलग सिद्ध स्थानों पर लेकर चलूँगा । 

धर्मशाला से वापसी में सीधा माता चिंतपूर्णी वाली सड़क पर चल दिए । ज्वाला जी मंदिर से कुछ किलोमीटर पहले रानीताल के पास से एक तिराहा है । इस तिराहे से एक सड़क दायीं और जा रही है जो सीधा माता चिंतपूर्णी को चली जाती है, इस जगह से कुछ किलोमीटर आगे मुख्य सड़क पर ही माँ बगलामुखी का बड़ा प्रसिद्ध मंदिर है। पहाड़ी इलाका होने के कारण मंदिर सड़क से नीचे है । सड़क पर मुख्य द्वार है यहाँ से नीचे सीडियां उतर कर ही मंदिर में जाया जाता है ।
 

Wednesday, 10 October 2018

Gujrat Yatra : Nageshwar Jyotirlinga Temple

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर  ( Nageshwar Jyotirling Temple )

पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा कि रुक्मिणी देवी मंदिरगोपी तालाब और बेट-द्वारका के दर्शन के साथ हमने नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन भी किये थे । रुक्मिणी देवी मंदिर के बाद बस का दूसरा पड़ाव नागेश्वर ज्योतिर्लिंग ही था । पिछली पोस्ट में ही इसके बारे लिखता तो पोस्ट बहुत लम्बी हो जाती इसलिए इसे अलग से इस पोस्ट में लिख रहा हूँ ।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग परिसर में विशाल शिव मूर्ति

Friday, 5 October 2018

Gujrat Yatra : Temples in and around Dwarka

रुक्मिणी देवी मंदिर, गोपी तालाब और बेट-द्वारका ( Rukmini Devi Temple, Gopi Talab and Bet Dwarka )


अगले दिन सुबह जल्दी से तैयार होकर , आठ बजे से पहले ही हम भद्रकाली चौक पहुँच गए । बस में कुछ सवारियाँ पहले ही आ चुकी थी । कुछ ही देर में जब सभी लोग आ गए तो बस चल पड़ी । आज ये हमें रुक्मणि मंदिर , नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, गोपी तालाब तथा बेट द्वारका लेकर जाने वाली थी । शहर से थोड़ा बाहर निकलते ही पहला पड़ाव आ गया । बस का परिचालक - गाइड और निर्देशक दोनों का काम कर रहा था । उसने बताया कि हम रुक्मणी देवी मंदिर पहुँच चुके हैं । उसने हमें मंदिर में जल्दी से जाकर दर्शन करने और आधे घंटे में बस पर वापिस आने को कहा और फिर बस से नीचे उतर कर, सभी सवारियों के साथ गाइड के रूप में मंदिर की तरफ चल दिया । हमारी बस के साथ ही दो तीन बसें और वहाँ पहुँच जाने से मंदिर में एकदम से भीड़ बढ़ गयी थी फिर भी लगभग आधे घंटे में दर्शन के बाद हम लोग वापिस बस में आ गए ।

रुक्मिणी देवी मंदिर 

Friday, 28 September 2018

Gujrat Yatra : Dwarkadhish Temple - Dwarka

गुजरात यात्रा – द्वारिकाधीश मंदिर, द्वारका

मेघश्यामं पीतकौशेयवासं श्रीवत्साङ्कं कौस्तुभोद्भासिताङ्गम् ।
पुण्योपेतं पुण्डरीकायताक्षं विष्णुं वन्दे सर्वलोकैकनाथम् ॥
मेघ समान रंग वाले, पीले रेशमी पीताम्बर धारण किए, श्रीवत्स के चिह्नवाले, कौस्तुभमणि से सुशोभित अंग वाले, पुण्य करने वाले, कमल समान लंबी आंख वाले सर्वलोक के एकमात्र स्वामी भगवान श्रीद्वारकाधीश भगवान श्रीकृष्ण को मैं नमस्कार करता हूँ ।

Dwarkadhish Temple

Saturday, 15 September 2018

Gangotri Yatra : Gangotri Dham and Vishwanath Temple Uttarkashi

                    यमुनोत्री – गंगोत्री यात्रा ( Gangotri Temple )

गंगोत्री यात्रा -2 :
पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा कि सुबह 6 बजे उत्तरकाशी से बस पकड़ गंगोरी, भटवारी, गंगनानी और फिर हर्षिल ,लंका और भैरों घाटी होते हुए लगभग 6 घंटे की यात्रा के बाद मैं 12 बजे गंगोत्री पहुँच गया । अब उससे आगे ..

गंगोत्री पहुँचते ही बस के परिचालक ने घोषणा कर दी कि यही बस दोपहर 2:00 बजे यहाँ से उत्तरकाशी वापिस जाएगी जिसको वापिस जाना हो 2:00 बजे तक बस में सवार हो जाये । मंदिर में दर्शन और पूजा पाठ के लिए दो घंटे कम नहीं थे । बस पार्किंग से गंगोत्री का मंदिर लगभग 300 मीटर दूर है,10-12 फीट चौड़ा रास्ता है और रास्ते के दोनों तरफ एक छोटा सा बाजार है जहाँ खाने पीने की दुकाने और पूजा सामग्री का सामान मिलता है।

Gangotri Temple

Tuesday, 11 September 2018

Gangotri Yatra - Part 1 : Uttarkashi to Gangtori

यमुनोत्री – गंगोत्री यात्रा ( Gangotri Yatra )


गंगोत्री यात्रा -1

पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा कि सुबह 6 बजे जानकी चट्टी से निकल कर ट्रेक करते हुए 9 बजे यमुनोत्री पहुँच गए। मंदिर में दर्शन के बाद जानकी चट्टी वापसी की ,वहाँ से जीप द्वारा बडकोट वापिस आये और फ़िर शाम चार बजे बडकोट से उत्तरकाशी की बस पकड ली। अब उससे आगे …..

बडकोट से उत्तरकाशी का रास्ता बेहद खूबसूरत है । कोटद्वार वाले रास्ते की याद आ गयी । सड़क के दोनों तरफ चीड़ का घना जंगल है । जब सड़क के किनारे लम्बे- लम्बे चीड़ के पेड़ खड़े हों तो ये एक सुन्दर मनभावन दृश्य तो उत्पन्न करते ही हैं , खाई और सड़क के बीच में एक दीवार का काम करते हुए मन में एक सुरक्षा का भाव भी कराते हैं। रास्ते में कई छोटे -2 गाँव पड़ते हैं , शाम का समय था , नौकरी पेशा लोग छुट्टी के बाद बस का इंतजार करते हुए खड़े मिलते । बस सभी जगह रूकती , कुछ सवारी चढ़ती , कुछ उतरती बस फिर आगे अपनी मंजिल की और चल पड़ती । सफ़र बढ़िया कट रहा था लेकिन धरासू पहुंचकर मेरे साथ एक मजेदार-यादगार किस्सा घटित हुआ ।

हर्षिल और भगीरथी

Wednesday, 5 September 2018

Yamunotri Yatra : Janki chatti to Yamunotri


यमुनोत्री – गंगोत्री यात्रा (Yamunotri Temple)

यमुनोत्री यात्रा पार्ट 2 : बड़कोट यमुनोत्री बड़कोट

पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा किस तरह सुबह 6 बजे घर से निकल कर , बस के लिए भाग दौड़ और फिर सीट के लिए नोक-झोंक के बाद आखिरकार शाम 6 बजे बड़कोट पहुँच गया। बड़कोट ,दिल्ली यमुनोत्री हाईवे पर एक छोटा नगर है । मुख्य बाज़ार इसी सड़क के दोनों तरफ बना है । इसी सड़क पर एक जगह बस स्टॉप है, कोई अलग से बस स्टैंड नहीं है। मैं बस से उतर कर सीधा आगे की तरफ चला गया और टैक्सी स्टैंड पर पहुँच गया । वहाँ चार पाँच जीप खड़ी थी । मालूम हुआ कि जानकी चट्टी के लिए शेयर्ड जीप यहीं से जाएगी । यमुनोत्री जाने के लिए सड़क मार्ग जानकी-चट्टी तक ही है । उससे आगे लगभग 6 किलोमीटर का ट्रेक है ।

यमुनोत्री मंदिर 

Wednesday, 29 August 2018

Yamunotri Yatra -1

यमुनोत्री – गंगोत्री यात्रा ( Yamunotri - Gangotri Yatra )

पार्ट 1 : अम्बाला से बड़कोट

2011 में जब बद्रीनाथ धाम और केदारनाथ यात्रा का प्रोग्राम बना था तब यमुनोत्री और गंगोत्री जाने का विचार भी था लेकिन यात्रा से कुछ दिन पहले भारी बारिश होने के कारण गंगोत्री जाने का मार्ग बंद हो गया था। जब इन जगहों पर गाड़ी वाले ने जाने से मना कर दिया तो हमने इन दोनों जगह को छोड़ अपने प्रोग्राम में हेमकुण्ड साहेब जोड़ लिया था । तीन साल बीत गए लेकिन इन जगह पर जाना हो ही नही पाया । 2015 में यहाँ जाने का फ़िर से प्रोग्राम बनाया और कुछ दोस्त भी साथ जाने के लिए तैयार हो गए । जैसे जैसे जाने का समय नज़दीक आता गया , एक-2 कर सभी ने मना कर दिया । मुझे इसका कुछ आभास पहले से ही था इस लिए मैंने अपना प्लान-बी भी तैयार रखा हुआ था । मैं गंगोत्री और यमुनोत्री जाने में और देर नही करना चाहता था इसलिये अकेले ही जाने का निश्चय कर लिया और यात्रा के लिए जरुरी जानकारी लेनी शुरू कर दी ।

in between Nainbag to Barkot

Monday, 13 August 2018

Grishneshwar Jyotirlinga Temple, Aurangabad

 घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर

त्र्यंबकेश्वर मंदिर में दर्शन के बाद हम लोग बस से शिर्डी चले गए । रात वहाँ रुके , मंदिर में साईं बाबा की समाधी देखी और अगले दिन सुबह शनि सिग्नापुर चले गये और वहाँ से घूमते घुमाते शाम तक औरंगाबाद शहर पहुँच गए । यहाँ हमारा बारह ज्योतिर्लिंगों में यह अंतिम ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर के दर्शन करने का प्रोग्राम था। अगले दिन सुबह जल्दी से तैयार होकर औरंगाबाद बस स्टैंड पहुँच गए और वहाँ से घृष्‍णेश्‍वर ज्योतिर्लिंग जाने के लिए बस ले ली और लगभग एक घंटे की यात्रा के बाद वहाँ पहुँच गए ।

Grishneshwar Jyotirling Temple