Showing posts with label Dhanchho. Show all posts
Showing posts with label Dhanchho. Show all posts

Wednesday, 1 March 2017

Manimahesh Yatra : Significance and Important Information of Yatra


 मणि महेश कैलाश यात्रा-1
मणि महेश कैलाश यात्रा-6 ( मणिमहेश महात्म्य कथा एवम अन्य जानकारी )

मणिमहेश पौराणिक महत्व :
देवभूमि  हिमाचल  का चंबा जिला शिवभूमि के नाम से विख्यात है। इस जिले में मणिमहेश़ ऐसा तीर्थ स्थल है जिसकी सदियों से जन-जन में मान्यता रही है। जम्मू के डोडा, भद्रवाह किश्तवाड़  क्षेत्रों  के लोग तो सैंकड़ो  मीलों का यह सफर नंगे पैर तय कर पवित्र झील में डुबकी लगाकर अपना जीवन धन्य मानते है । हिमाचल प्रदेश मे चम्बा जिले के भरमौर के एक पर्वत शिखर पर ब्रह्माणी देवी का तत्कालीन मंदिर है और यह मंदिर बुद्धिल घाटी में स्थित है। चम्बा जिले मे ही स्थित मणिमहेश- कैलाश भी बुद्धिल घाटी का ही एक भाग है। मणिमहेश धौलाधार, पांगी व जांस्कर पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा हुआ है। मणिमहेश को कैलाश पर्वत के नाम से भी जाना जाता है, प्राचीन काल से श्रद्धालु इस कैलाश की तीर्थ यात्रा करते आ रहे हैं। यहाँ पर एक झील है जो मणिमहेश झील या कैलाश कुंड के नाम से जाना जाता है। इस झील की उँचाई समुद्र तल से लगभग 13,500 फुट यानि 4110 मीटर की है, इस झील की पूर्व की दिशा बर्फ से ढका मणिमहेश पर्वत है इसकी चोटी समुद्र तल से लगभग 18,564 फुट ऊंचाई पर है।

मणिमहेश झील पर स्तिथ पूजा स्थल

Thursday, 23 February 2017

Manimahesh Yatra- Part 5 .Return Journey from Manimahesh

मणि महेश कैलाश यात्रा-5 ( मणिमहेश-हडसर- भरमौर- पठानकोट ) 

पिछले भाग से आगे ....
पथरीला रास्ता और घना जंगल; ऊपर से कृष्ण पक्ष की  काली रात। डर लगना स्वाभाविक था लेकिन मुझे अपने से आगे और पीछे ,दोनों जगह से, किसी के चलने और बोलने की आवाज आ रही थी- मतलब और यात्री भी आगे पीछे हैं। इसी बात का होंसला था। मैंने तेजी से चलकर आगे वाले ग्रुप के साथ होना चाहता था लेकिन वो भी तेज चल रहे थे । फिर भी थोड़ी देर में मैंने उनको पकड़ लिया और उनके साथ ही हो लिया । उनका साथ मिल जाने से भय निकल गया । वे तीन लड़के थे और तीनो पंजाब से बाइक पर आये थे । कल रात वे जाते हुए धन्छो में रुके थे और आज दर्शन के बाद वापिस लौट रहे थे । वे भी मेरी तरह बुरी तरह थके हुए थे।

Thursday, 9 February 2017

Manimahesh Yatra -Part 3 (Hadsar-Dhanchho-Gaurikund-Manimahesh

                                                            Manimahesh Yatra 

मणि महेश कैलाश यात्रा-3 (हडसर-धन्छो-गौरीकुंड-मणिमहेश) 
   
सुबह 5 बजे अलार्म की आवाज सुनकर उठा । अच्छी नींद के साथ ही सारी थकावट दूर हो चुकी थी । नहाने का काम तो रात को ही निपटा दिया था, बाकि काम 10 मिनट में निपटा कर मुंह हाथ धोया और तैयार हो गया । एक छोटा पिठू बैग ट्रैकिंग के लिए तैयार किया , जिसमे एक रेन कोट , एक टोर्च और हल्का खाने पीने  का सामान । इस समय यहाँ काफ़ी ठंड थी इसलिए गर्म कपड़े मैंने पहन ही लिए थे । बाकी जो भी सामान बचा था उसे एक बैग में रखकर बैग उसी कमरे में रख दिया और सुबह 5:30 से पहले ही मैंने रूम छोड़ दिया और नीचे मुख्य सड़क पर आ गया ।