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अब
तक .......... महाकाल के दर्शनों के बाद हम लोगों ने नाश्ता किया और नाश्ते के बाद हमने एक ऐसे ऑटो कि तलाश शुरू कि जो हमें जंतर मंतर , जिसे
वेधशाला भी कहते हैं , ले
जाए। हमारी गाड़ी का समय दोपहर का था और उसमें अभी काफी समय था इसलिए हम लोग जंतर मंतर घूमना चाहते थे । आज
रंग पंचमी का दिन था और यहाँ काफी धूम धाम थी। जैसे हमारे उतर भारत में होली मनाई जाती है वैसे ही यहाँ रंग पंचमी। इसलिए ज्यादातर दुकानें बंद थी और जो खुली थी वो भी सिर्फ कुछ घंटों के लिए। आज रंग पंचमी होने के कारण ऑटो भी काफी कम थे। जो थे वो ज्यादा पैसे मांग रहे थे। आखिर कुछ मोल भाव के बाद एक ऑटोवाला हमें जंतर मंतर / वेधशाला
होते हुए रेलवे स्टेशन जाने के लिए 150 रुपये
में मान गया। हम ऑटो में सवार हो अपनी नयी मंजिल जंतर मंतर / वेधशाला
की ओर चल दिए ।
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| वेधशाला (Wikipedia) |
