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भाग 3: गौरीकुंड- केदारनाथ- गौरीकुंड ( Kedarnath Yatra )
दूसरे
दिन सुबह अंधेरे में ही उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होकर और तप्त कुंड में स्नान कर
एक दुकान में चाय-नाश्ता किया। पिट्ठू लाद कर सूर्योदय से काफी पहले ही गौरी कुंड
से केदारनाथ को चल पडे। हमें दिन के दिन ही वापिस आना था यानी कि कुल 28 किलोमीटर चलना था। हममें से
अधिकतर एक महीने में 28 किलोमीटर चलने वाले थे। उजाला होने तक करीब 2 कि.मी. चढ़ाई
चढ़ ली थी। रास्ते में अन्य यात्री भी मिल रहे थे। शुरु में तो सभी एक साथ ही चल रहे थे लेकिन धीरे
– धीरे सभी आगे पिछे हो गये।
गुप्ता जी रोज सुबह 5-6 किलोमीटर की सैर करते हैं और काफ़ी व्यायाम भी इसीलिए गुप्ता जी सबसे आगे चल रहे थे और सरोहा जी सबसे पिछे। हम सब ने रामबाड़ा
मिलने का निश्चित किया था कि जो भी पहले वहाँ पहुँचेगा, रुक कर बाकी साथियों का
इन्तज़ार करेगा.