Monday, 11 September 2017

Kedarnath Jyotirling Yatra-2011

 केदारनाथ यात्रा- 2011

मैं आज आपको अपने साथ भोले नाथ के धाम केदारनाथ लेकर चलूँगा । केदारनाथ - भोले बाबा के 12 ज्योतिर्लिंगों में से ग्यारवें क्रमांक पर है लेकिन यात्रा में सबसे कठिन है । जहाँ बाकि सभी ज्योतिर्लिंग मैदानी इलाकों में हैं और यहाँ केदारनाथ में 14 किलोमीटर की ख़तरनाक चढ़ायी . (2013 की आपदा के बाद ये अब 2-3 किमी और बढ़ गयी है ). मैंने 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने का सिलसिला सबसे पहले सबसे कठिन से ही शुरू करने का फ़ैसला लिया .

जून-2011 में केदारनाथ ,बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिये  एक तवेरा गाड़ी 1 +8 सिटर बुक कर ली । हमने जून का महीना इसलिए चुना था क्योकि इन दिनों पहाडॊं में बारिश की संभावना बहुत कम होती है और भूस्खलन का खतरा भी ।


Thursday, 7 September 2017

Omkareshwar-Mamleshwar Jyotirling darshan

ओंकारेश्वर- ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग  दर्शन
पिछले भाग से आगे

अगले दिन सुबह जल्दी उठकर हम संक्रांति स्नान के लिए आश्रम के सामने वाले नरसिंह घाट पर चले गए। इस बार राम घाट पर नहीं गए क्योंकि राम घाट दूर भी था और वहां भीड़ भी ज्यादा मिलनी थी। स्नान करने के बाद वापिस आश्रम आए और नाश्ता करने के बाद इंदौर जाने की तैयारी करने लगे।

ओम्कारेश्वर मन्दिर

Thursday, 31 August 2017

Simhastha Kumbh Ujjain

उज्जैन कुम्भ यात्रा
पिछले वर्ष मेरा अपने बचपन के दो दोस्तों -सुशील और स्वर्ण , के साथ उज्जैन कुम्भ जाने का प्रोग्राम बना । प्रोग्राम कुछ इस तरह बनाया ताकि संक्रांति के मुख्य स्नान पर हम वहीँ हों ।उसी के अनुसार आने जाने की टिकेट बुक करवा दी गयी । हमारा प्रोग्राम कुछ इस तरह से था ।
13 मई की रात को अम्बाला से चलकर 14 दोपहर तक उज्जैन पहुँचना ।
14 मई शाम को कुम्भ स्नान और महाकाल दर्शन उपरांत उज्जैन भ्रमण और रात्रि विश्राम ।
15 मई सुबह संक्रांति के मुख्य स्नान के बाद इंदौर होते हुए ओमकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिये जाना और रात्रि विश्राम इंदौर में करना ।
16 मई दोपहर को इंदौर से अम्बाला के लिये वापसी ।


Tuesday, 22 August 2017

Amarnath Yatra :Holy Cave to Baltal base camp

अमरनाथ यात्रा  ( Amarnath Yatra )

भाग 6 : पवित्र गुफा से बालताल

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गुफा से बाहर निकल कर भोले नाथ से अगले वर्ष फिर बुलाने की प्रार्थना करता हुआ मैं सीडियां उतरने लगा। चन्दन मेरे साथ ही था। जूताघर पहुंचकर वहां से हमने अपने जूते लिए । नीचे उतर कर एक लंगर से बेसन का एक पुड़ा मीठी चटनी के साथ खाया और फ़िर एक कटोरी खीर। खाना खाकर ऊपर से गरम चाय पी और फिर से तरोताजा हो वापसी शुरू कर दी। थोड़ी दूर चलने के बाद हमें बाकि के चारों साथी भी मिल गए । वे अभी स्नान करने की तैयारी में थे और गर्म पानी मिलने का इंतजार कर रहे थे । हम उन्हें दोमेल में गिरी जी महाराज के लंगर में मिलने का तय करके अपनी वापसी यात्रा पर चल दिए । देवेंदर और पाठक जी पहले ही घोड़ों से बालताल की और जा चुके थे । यहाँ मैं यह बताना चाहूँगा की गिरी जी महाराज को अमरनाथ यात्रा पर लगने वाले लंगरों का जनक कहा जाता है । सबसे पहले यहाँ केवल उनका ही लंगर हुआ करता था । धीरे -2 लंगर लगाने वालों की संख्या बढने लगी ,1996 की त्रादसी के बाद तो इनमे काफी तेज़ी आई। एक बात और अमरनाथ यात्रा में सभी जगह लगने वाले भंडारों में सिर्फ़ गिरी जी महाराज का लंगर स्थल का निर्माण ही स्थायी है । 


Tuesday, 8 August 2017

Amarnath Yatra : Panchtarni to Holy Cave


अमरनाथ यात्रा ( Amarnath Yatra )

भाग 5 : पंचतरणी से पवित्र गुफा 


पिछले भाग से आगे :

अगली सुबह सभी जल्दी ही उठ गए और दैनिक दिनचर्या से निर्वित हो आगे के सफर के लिये निकल गए । आज भी देवेंदर और शान्तनु दादा ने शुरू से ही घोड़े कर लिये । चन्दन को भी उन्ही के साथ घोड़े पर भेज दिया।पंचतरणी से पवित्र गुफा की दुरी 6 किमी है । शुरू में एक- ढेड़ किलोमीटर रास्ता तो पंचतरणी नदी के साथ-साथ ही है, उसके बाद लगभग ढेड़ किलोमीटर ख़डी चढ़ाई है । 3660 मीटर से 3950 मीटर तक । ये चढ़ाई संगम पर जाकर ख़त्म होती है, जहाँ संगम घाटी से होते हुए, बालताल से आने वाला मार्ग इसमें मिल जाता है । संगम से आगे लगातार बेहद हलकी उतराई है जिसमे से अधिकतर रास्ता ग्लेशियर के ऊपर से है जिसके नीचे से अमरावती नदी बहती रहती है ।
पवित्र गुफा

Tuesday, 1 August 2017

Amarnath Yatra : Sheshnag to Panchtarni

अमरनाथ यात्रा  ( Amarnath Yatra )

भाग 4 : शेषनाग से पंचतरणी

पिछले भाग से आगे :

अगले सुबह सभी 6 बजे से पहले ही उठ चुके थे लेकिन ठण्ड काफी होने के कारण बिस्तर में ही दुबके हुए थे । धीरे -2 एक- एक करके सभी दैनिक दिनचर्या से निर्वित होने लगे । मैं भी अपना कैमरा लेकर पीछे की तरफ बर्फ से लदी पहाड़ी की सूर्योदय के समय तस्वीरें लेने के लिये बाहर आ गया लेकिन चोटी पर तो पहले से ही काफ़ी धुप आ चुकी थी । जिस दृश्य की उम्मीद थी वो तो कब का जा चूका था । खैर कुछ फोटो लेकर मैं भी वापिस टेंट में आ गया और चलने की तैयारी करने लगा । चन्दन से उसका हाल-चाल पूछा, कल से बेहतर था लेकिन मुझे आशंका थी कि उसकी तबियत आज भी ख़राब हो सकती है क्योंकि आज हमें ज्यादा ऊँचाई से होकर जाना था।

ब्रह्मा ,विष्णु ,महेश 

Thursday, 27 July 2017

Amarnath Yatra- Part 3: Pahalgam to Sheshnag

अमरनाथ यात्रा  ( Amarnath Yatra )
भाग 3 : पहलगाम से शेषनाग
पिछले भाग से आगे :

सुबह 6 बजे से पहले ही सब उठ चुके थे । दैनिक दिनचर्या से निर्वित हो सभी नाश्ते के लिए लंगर पर चले गए । हालांकि वहां 7-8 लंगर थे लेकिन सब पर काफी भीड़ थी । उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत के व्यंजन उपलब्ध थे । कुछ देर बाद सभी नाश्ता करके आ गए और यात्रा के लिए तैयार हो गए तब तक कैम्प के गेट खुल चुके थे ।सभी के पंजीकरण चेक करने के बाद ही जाने दिया जा रहा था । कैम्प  से बाहर निकलकर बाहर से चंदनवाड़ी के लिए लोकल गाड़ियाँ मिलती है । चंदनवाडी यहाँ से 16 किमी दूर है और वहां तक अच्छी सड़क बनी है । रास्तेमें ही बेताब वैली है जो पहलगाम का एक फेमस पर्यटन स्थल है ।
शेषनाग झील

Thursday, 20 July 2017

Amarnath Yatra : Jammu to Pahalgam Base Camp

अमरनाथ यात्रा - ( Amarnath Yatra )
Jammu to Pahalgam Base Camp - जम्मू से पहलगाम 
पहला भाग पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें

हमने इस यात्रा के लिए अम्बाला से ही एक टवेरा बुक कर ली थी । हम कुल छह लोग थे । मेरे साथ मेरा भतीजा चिरंजीव @चन्दन ,एक मेरे सहकर्मी सुखविन्दर , तीन मेरे दोस्त शुशील मल्होत्रा ,स्वर्ण और देवेंद्र थे। इनमे से चन्दन और सुखविन्दर की यह पहली यात्रा थी , बाकि सब लोग पहले भी कई बार जा चुके थे । तय दिन हमें अम्बाला से निकलते -निकलते सुबह के 9 बज गए । सारा सामान छत पर बांध कर हम लोग यात्रा के लिए रवाना हो गए । पहला विश्राम जालंधर में लिया जो अम्बाला से लगभग 200 किलोमीटर है । वहां शुशील के मामा जी की छोले भटूरे की दुकान है । हम जब भी गाड़ी से जाएँ तो यहाँ जरूर रुकते हैं । यहाँ रूककर सबने छोले भटूरे और छोले चावल खाये । खाना खाने के बाद सबने चाय पी फिर उनसे विदा लेकर आगे की यात्रा जारी रखी । यहाँ हमें लगभग एक घंटा लग गया ।


Friday, 14 July 2017

Amarnath Yatra - General information and instructions for the Yatra

अमरनाथ यात्रा -Amarnath Yatra

वैसे तो मैं पहले भी दो बार अपने ब्लॉग पर अमरनाथ यात्रा के बारे में लिख चूका हूँ –पहली बालताल रूट से (Baltal),दूसरी बार पहलगाम रूट से (Chandanwari) ,लेकिन दोनों बार इस अंग्रेजी में ही लिखा। बहुत से मित्रों की ख़वाहिश है की मैं इसे एक बार फिर से लेकिन हिंदी मैं लिखूं । इसलिये फिर से अमरनाथ यात्रा को लेकर हाज़िर हूँ । इस वर्ष भी ,अभी एक सप्ताह पहले ही बालताल रूट से अमरनाथ यात्रा करके आया हूँ लेकिन मेरे इस लेख का आधार पिछली बार की गयी यात्रा रहेगी जिसमे दोनों रूट कवर हुए थे यानि हमने पहलगाम से शुरू कर बालताल पर समाप्त किया था। यात्रा विवरण से पहले मैं इस यात्रा के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी साँझा करना चाहूँगा ।

अमरनाथ गुफ़ा  

Sunday, 14 May 2017

वो सुबह कभी न आएगी


अभी तक मैंने यात्रा वृतांत ही लिखे हैं लेकिन आज कुछ हटकर लिख रहा हूँ । अपनी माँ के साथ बिताये पलों और ख़ासकर माँ के साथ बिताये अंतिम क्षणों को लेखनी की सहायता से कहना चाह रहा हूँ।

माँ भगवान से भी बढ़कर है क्यूंकि भगवान तो हमारे नसीब में सुख और दुख दोनो देकर भेजते हैं, लेकिन  हमारी माँ हमें सिर्फ़ और सिर्फ़ सुख ही देना चाहती है। माँ त्याग, बलिदान, क्षमा, धैर्य, ममता की प्रतिमूर्ति होती है । वैसे तो नारी के कई रूप हैं जैसे माँ, बहन, बेटी, बहु एवं सास लेकिन माँ का रूप ही सबसे बड़ा माना जाता है । ये बातें तो सभी जानते हैं और बहुत से मानते भी हैं तो मैं सीधा अपनी बात पर आता हूँ ।

मई 2010: माँ पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रही थी । हार्ट की प्रॉब्लम थी । डाक्टरों के अनुसार दिल के एक वाल्व में जन्म से ही छेद था । पहले समस्या कम थी ,कभी कभी परेशानी होती थी , दवाई लेने से ठीक हो जाती थी लेकिन जैसे जैसे उम्र बढ़ती गयी बीमारी भी बढती गयी । दवाई और परहेज दिनचर्या का हिस्सा बन गये । एक बार हार्ट अटैक भी आया ,तबियत ज्यादा ख़राब हुई तो माँ एक सप्ताह हस्पताल में दाखिल भी रही। अब डाक्टर ऑपरेशन के लिये कहने लगे लेकिन माँ ऑपरेशन के नाम से ही डरती थी । एकदम मना कर देती। हमारे कहने-समझाने पर भी न मानती ।