Thursday, 26 April 2018

Sri Padmavati Temple , Tiruchanur (Tirupati)

श्री पद्मावती मंदिर, तिरुचनूर  ( Sri Padmavati Temple )

ॐ नमो भगवती पद्मावती सर्वजन मोहनी,
सर्व कार्य करनी, मम विकट संकट हरणी,
मम मनोरथ पूरणी, मम चिंता चूरणी नमों ।
ॐ ॐ पद्मावती नम स्वाहा: ।।

तिरुमला में दर्शन के बाद हम लोग बस से तिरुपति लौट आये । बस स्टैंड से हमने देवी पद्मावती मंदिर जाने के लिये ऑटो रिक्शा के बारे में पूछा लेकिन कोई भी 100 रूपये से कम में चलने को तैयार नहीं था । हम बस स्टैंड से बाहर आ गये और यहाँ से 60 रूपये में पद्मावती मंदिर जाने के लिये ऑटो रिक्शा मिल गया । मंदिर बस स्टैंड से लगभग पाँच किलोमीटर दूर है और लगभग 15 -20 मिनट में हम मंदिर पहुँच गए । मंदिर जाने के लिए सड़क पर ही एक भव्य गेट बना हुआ है ।

देवी पद्मावती 

Wednesday, 18 April 2018

Tirupati Bala ji: Adobe of Lord Venkateshwara

तिरुपति बालाजी मंदिर - Tirupati Bala ji Temple

वेंकटाद्रि समस्थानं ब्रह्माण्डे नास्ति किञ्चन। वेंकटेश समोदेवो न भूतो न भविष्यति
 ( वेंकटाद्री के समान पवित्र स्थान इस ब्रह्माण्ड में और कहीं नहीं है। श्री वेंकटेश्वर जी (बालाजी) के समान देवता इससे पहले न कभी कोई था और न ही होगा।)

पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा कि श्री मल्लिकार्जुन ज्योर्तिलिंग के दर्शन के बाद हम बस से करनूल पहुँच गए, जहाँ से रात को 9:50 की ट्रेन से तिरुपति के लिए रवाना हो गए । सारे दिन की भाग दौड़ से हम काफी थके हुए थे इसलिए अपनी बर्थ पर लेटते ही गहरी नींद आ गयी। अगले दिन सुबह ट्रेन अपने तय समय 6:40 से काफी पहले ही तिरुपति स्टेशन पर पहुँच गयी । तिरुपति स्तिथ अपनी कंपनी के गेस्ट हाउस में हमारी आज के लिए पहले से ही बुकिंग थी। वहाँ फोन कर वहाँ की लोकेशन ले ली और रेलवे स्टेशन से बाहर आकर एक ऑटो रिक्शा से गेस्ट हाउस चले गए । गेस्ट हाउस ज्यादा दूर नहीं था , वहाँ पहुँचने में 10 मिनट भी नहीं लगे। वहाँ पहुँचकर बिना समय गवाएँ ,नहा-धोकर जल्दी से तैयार हो गए और नाश्ता करने के बाद, एक छोटे बैग को छोड़कर सारा सामान वहीँ रख दिया और फिर ऑटो रिक्शा से सेंट्रल बस स्टैंड चले गए ।

Thursday, 12 April 2018

SRISAILAM – Abode of Lord Mallikarjun Swami and Bhramaramba Devi

 मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग ( Mallikarjun Jyotirling Temple )

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हैदराबाद से निकलते- निकलते दोपहर के तीन बज चुके थे। हैदराबाद से 210  किमी दूर पर करनूल जिले में श्री शैल पर्वत पर स्थित श्री मल्लिकार्जुन ज्योर्तिलिंग और सिद्धशक्तिपीठ भ्रमरम्बा देवी का दिव्य धाम हमारी यात्रा का अगला पड़ाव था । सारे रास्ते सड़क ठीक ठाक बनी है ,काफी जगह फॉर लेन भी है फिर भी यहाँ तक पहुँचने में बस ने 6 घंटे लगा दिए। बस 2X2 डीलक्स थी, सीटें आरामदायक थी ,ज्यादा जगह रुकी भी नहीं ; सिर्फ एक जगह खाने पीने के लिए ही विश्राम लिया लेकिन धीमे चलने के कारण  मात्र 35 किमी / घंटे की ही औसत निकाल पाई। यदि इतना सफ़र हरियाणा रोडवेज में होता तो चार घंटे से भी कम समय लगता।

Friday, 6 April 2018

South India Trip: Hyderabad


दक्षिण भारत यात्रा : हैदराबाद

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अगले दिन सुबह जल्दी से उठ कर तैयार हो गए । नाश्ते के लिए घर से खाने के दुसरे सामान के साथ देसी घी की पिन्नियां भी बना कर ले गए थे ताकि नयी जगह पर हमें सुबह-सुबह नाश्ते के लिए परेशान न होना पड़े । तैयार होने के बाद चाय कमरे पर ही मंगवा ली और नाश्ता कर लिया । आज हमें हैदराबाद घूमना था जिसके लिए हमारे पास आज सिर्फ आधा दिन था। दोपहर अढाई बजे हमारी श्रीसैलम के लिए बस में बुकिंग थी । हैदराबाद से श्रीसैलम के लिए बस में एडवांस में रिजर्वेशन करवाने की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध है । इसके लिये आप तेलंगाना स्टेट रोडवेज की वेबसाइट http://www.tsrtconline.in/oprs-web/ से अपनी मनचाही सीट बुक कर सकते हैं।

Tuesday, 3 April 2018

South India Trip: Ambala to Hyderabad

दक्षिण भारत यात्रा : अम्बाला से हैदराबाद
सभी यात्राएं उद्देश्यपरक होती हैं , कोई भी यात्रा बिना उद्देश्य के नहीं होती । एक सनातनी होने के नाते , मेरी भी काफी समय से इच्छा थी कि पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंगों, चारों धाम और सिद्ध शक्तिपीठों के दर्शन का सौभाग्य पा सकूं। इसी सिलसिले में पिछले वर्ष दिसम्बर में दक्षिण भारत जाने का सौभाग्य मिला । इस यात्रा से पहले तीन धाम और दस ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर चूका था और इस यात्रा से मेरी चार धाम और बारह ज्योतिर्लिंग के दर्शन की अभिलाषा पूर्ण होने जा रही थी। चूँकि दक्षिण भारत की यात्रा काफी लम्बी दुरी की यात्रा है ,यहाँ बार –बार तो जाना हो नहीं सकता , इसलिए कोशिश थी कि जितना संभव हो सके इसमें और भी दर्शनीय स्थलों को जोड़ लिया जाये ।

Wednesday, 28 February 2018

Uttrakhand Yatra : Kalimath

उत्तराखंड यात्रा : कालीमठ ( Kalimath Temple )

ओम्कारेश्वर मंदिर में दर्शन के बाद हम कुंड होते हुए गुप्तकाशी की तरफ चल पड़े । उखीमठ से आगे सड़क की हालत ख़राब है । कुंड में मन्दाकिनी नदी का पुल पार करके गुप्तकाशी की तरफ मुड़ने के बाद सड़क की हालत बद से बदतर होती चली गयी । धीरे -२ चलते हुए हम गुप्तकाशी के उस तिराहे पर पहुँच गए जहाँ से कालीमठ का रास्ता अलग हो रहा था । इस तिराहे से कालीमठ मात्र 9 किलोमीटर दूर है और त्रियुगी नारायण लगभग 40 किमी दूर । यहाँ एक चाय की दुकान पर गाड़ी रोक चाय का आर्डर दिया और हम आगे के प्रोग्राम पर चर्चा करने लगे । सड़क की हालत देखकर इतना तो तय था की यदि हम त्रियुगी नारायण जाते हैं तो आने जाने में कम से कम 3 घंटे लगने थे ।इस समय साढ़े तीन बज रहे थे। कालीमठ आने जाने में अलग समय लगना था और हमें शाम तक श्रीनगर भी पहुँचना था । सारी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए त्रियुगी नारायण जाने का प्रोग्राम स्थगित किया गया । चाय पीकर हम कालीमठ की तरफ चल दिए ।

माँ काली मंदिर

Friday, 23 February 2018

Uttrakhand Yatra : Chopta and Omkareshwar temple, Ukhimath

उत्तराखंड यात्रा : मंडल –चोपता – ओम्कारेश्वर मंदिर , उखीमठ


पिछले भाग में आपने पढ़ा कि मंडल पहुँचकर मैं, गौरव और सागर के साथ शेयर्ड जीप में बैठकर सगर चला गया । वहां पहुँचकर गौरव और सागर ने अपना सामान गाड़ी से लिया और अपनी बाइक से गोपेश्वर होते हुए अपने घर गाजियाबाद को निकल गए। उन्हें आज रात घर पर पहुंचना था ताकि कल सुबह वो अपने ऑफिस जा सके । मैं अपनी कार लेकर मंडल वापिस आ गया । अब आगे .........

जब मैं मंडल आकर होटल के कमरे में पहुँचा ,तब तक सुखविंदर और सुशील नहा कर तैयार हो चुके थे। मैं भी जल्दी से तैयार हो गया और फिर सब अपना सामान लेकर नाश्ते के लिए होटल वाले के ढाबे पर आ गये। उसे हरी मिर्च डालकर आलू के परांठे बनाने को बोल दिया । आज सुशील बहुत खुश था उसे कई दिनों बाद हरी मिर्च खाने को मिलने वाली थी । ढाबे वाले ने भी बढ़िया स्वादिष्ट परांठे बनाये ; लग ही नहीं रहा था हम उत्तराखंड में किसी ढाबे पर नाश्ता कर रहे हैं । ऐसे लग रहा था जैसे हम किसी पंजाब के ढाबे पर तंदूरी परांठे खा रहे हों । इस टूर का सबसे बढ़िया खाना यहीं खाया ।


Friday, 9 February 2018

Uttrakhand Yatra :Anusuya Devi Temple

रुद्रनाथ यात्रा : अनसूया माता मंदिर से मंडल

कंडिया बुग्याल में खाने पीने में ही 40-45 मिनट लग गए; इस समय शाम के 6:30 हो चुके थे और हल्का अंधेरा होना शुरू हो गया था। छानी वाले की इच्छा थी की हम रात को उसके पास ही रुक जाएँ। हमने आपस में विचार विमर्श किया तो सभी की सलाह थी कि आगे चलते हैं, बाबा जी भी पहले से ही तैयार थे। बस फिर क्या था सबने अपने अपने बैग उठाएं और अनसूया मंदिर की तरफ चल दिए। कंडिया बुग्याल (2346 मीटर) से अमृत गंगा नदी (2020 मीटर) तक नीचे 2 किलोमीटर की तीखी उतराई है।

अमृत गंगा

Monday, 5 February 2018

Rudranath Yatra : Rudranath Temple to Kandiya Bugyal


रुद्रनाथ यात्रा : रुद्रनाथ से कंडिया बुग्याल


रुद्रनाथ मंदिर (3590 मीटर) में भगवान शंकर के एकानन रूप में यानि मुख की पूजा की जाती है, जबकि पंचानन रूप में संपूर्ण शरीर की पूजा नेपाल की राजधानी काठमांडू के पशुपतिनाथ में की जाती है। यहाँ विशाल प्राकृतिक गुफा में बने मंदिर में शिव की दुर्लभ पाषाण मूर्ति है। यहाँ शिवजी गर्दन टेढे किए हुए हैं। मंदिर के अन्दर ही शिव-परिवार, सेषासन पर लेटे हुये विष्णु जी आदि कई दुर्लभ प्रतिमायें रखी हुई हैं। रुद्रनाथ के कपाट, परंपरा के अनुसार खुलते-बंद होते हैं। ठण्ड के मौसम में छह माह के लिए रुद्रनाथ जी गद्दी गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में लाई जाती है, जहां पर ठण्ड के मौसम के दौरान नीलकंठ महादेव जी की पूजा होती है।

माँ नंदा देवी 

Thursday, 1 February 2018

Rudranath Yatra : Panar to Rudranath Temple

                                       
रात को हम जल्दी सो गये थे तो सुबह आँख भी जल्दी खुल गयी, लेकिन बाहर ठण्ड बहुत थी तो इसीलिए चुपचाप रज़ाई में दुबके रहे । जिस जगह मैँ सोया हुआ था उसके पास ही एक खिड़की थी जिसके पल्लों के सुराख में से ठंडी हवा अंदर आ रही थी । उसी सुराख से बाहर पूरा अँधेरा भी दिख रहा था । मैं थोड़ी रोशनी के इंतजार में था ताकि उठकर बाहर बुग्याल में घूम सकूँ । लगभग 5:30 बजे जब बाहर हल्की रोशनी हो गयी तो मैं उठकर कमरे से बाहर आ गया ,बाकी अभी सब सो रहे थे । बाहर का दृश्य बड़ा मनमोहक था । कल शाम को बादल होने से हम कोई भी चोटी नही देख पाए थे लेकिन इस समय सभी चोटियाँ दिख रही थी। मैँ दोबारा कमरे में गया और अपना कैमरा उठा लाया लेकिन अभी रोशनी पर्याप्त न होने के कारण फ़ोटो साफ नही आ रही थी ।

गोल्डन चौखम्बा