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Thursday, 12 July 2018

Kovalam Beach - Trivandrum

कोवलम बीच- त्रिवेंद्रम (तिरूअनंतपुरम), (Kovalam Beach, Trivandrum)

पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा कि हम लोग कन्याकुमारी और सुचिन्द्रम मंदिर घुमने के बाद वापिस नागरकोइल स्टेशन आ गए और वहाँ से दोपहर की लोकल ट्रेन से त्रिवेंद्रम- जिसे आजकल तिरूअनंतपुरम कहा जाता है -के लिए निकल गए। त्रिवेंद्रम कन्याकुमारी से लगभग 100 किमी दूर है और लगभग तीन घन्टे  की ट्रेन यात्रा के बाद हम त्रिवेंद्रम पहुँच गए ।


Thursday, 28 June 2018

Kanyakumari and Suchindrum Temple

कन्याकुमारी और सुचिन्द्रम मंदिर :
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अगले दिन सुबह साढ़े 4 बजे ट्रैन नागरकोइल स्टेशन पहुँच गयी। यह स्टेशन कन्याकुमारी से 20 किमी पहले एक जंक्शन है। अधिक्तर गाड़िया यहीं से होकर गुजरती हैं और  कन्याकुमारी तक तो कुछ ही गाड़ियाँ जाती हैं । ट्रैन से उतर कर हम प्लेटफार्म एक पर बने रिटायरिंग रूम चले गए जहां शौचालय और स्नानघर की सुविधा थी । इस सुविधा का हमने भी लाभ उठाया और नहा धोकर तैयार हो गए । हल्का फुल्का नाश्ता करने के बाद हमने अपना सामान स्टेशन पर ही बने क्लॉक रूम में जमा करवा दिया और एक छोटा पिठ्ठू बैग लेकर स्टेशन से बाहर आ गए । नागरकोइल स्टेशन ,कन्याकुमारी जाने वाले मुख्य राजमार्ग से लगभग आधा किलोमीटर अन्दर  है । स्टेशन के बाहर हमने एक ऑटो वाले से कन्याकुमारी जाने के लिए पूछा , उसने बताया कि वो हमें मुख्य मार्ग पर छोड़ देगा जहाँ से हमें कन्याकुमारी के लिए आराम से बस मिल जाएगी  ऑटो से कन्याकुमारी जाना काफी महंगा पड़ेगा । हमने उसकी बात मान ली और उसने हमें 30/40रुपये में मुख्य मार्ग पे बने बस स्टॉप पर छोड़ दिया । कुछ ही मिनट के अंतराल के बाद हमे कन्याकुमारी के लिए बस मिल गयी।

Thursday, 7 June 2018

Meenakshi Temple , Madurai


मीनाक्षी मंदिर ,मदुरै – Meenakshi Temple ,Madurai

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रामेश्वरम में दर्शन करने के बाद हम लोग वापिस रामेश्वरम रेलवे स्टेशन आ गए और वहाँ से मदुरै जाने वाली ट्रेन पकड़ ली । मदुरै यहाँ से 160 किमी दूर है और लगभग चार  घण्टे में हम मदुरै पहुँच गए । मदुरै रेलवे स्टेशन पहुंच कर हमने अपना सामान क्लॉक रूम जमा करवा दिया और एक छोटा सा बैग लेकर मंदिर की तरफ चल दिए । मंदिर रेलवे स्टेशन से ज्यादा दूर नहीं है मुश्किल से 1 किलोमीटर दूर होगा । रेलवे स्टेशन से बाहर निकल कर थोड़ा दायीं तरफ़ चलना है और पहले चौराहे से बायीं तरफ मुड़ कर बिलकुल सीधा जाना है । रेलवे स्टेशन से लेकर मंदिर तक का रास्ता व्यस्त मार्किट से होकर है, इस रास्ते से जाने पर आपको मंदिर का पश्चिमी गोपुरम  दिखाई देता है ।

Thursday, 31 May 2018

Sri-Ramanathaswamy-Temple-Rameshwaram

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग दर्शन

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यात्रा तिथि : 31 दिसम्बर 2017  
अगले दिन सुबह ट्रेन अपने निर्धारित समय पर रामेश्वरम स्टेशन पहुँच गयी । थोड़ी देर पहले जब ट्रेन समुंदर पर बने पम्बन ब्रिज को पार कर रही थी ,तब पुल से गुजरने के कारण होने वाली भारी आवाज से मेरी आँख खुल गयी थी और मैं समझ गया था कि ट्रेन अब समुंदर पार कर जल्दी ही रामेश्वरम पहुँचने वाली है । उस समय काफी अँधेरा था और ट्रेन भी काफी धीमी गति से चल रही थी। रात के समय ट्रेन के डिब्बों से सागर के पानी पर पड़ रही रोशनी बड़ा ही सुदर दृश्य उत्पन्न कर रही थी ,यूँ लग रहा था जैसी किसी ने सागर के गले चमचमाती हुई माला डाल दी हो।

मंदिर गलियारा 

Thursday, 24 May 2018

Sri Kanchi Kamakshi Amman Temple


कांची कामाक्षी अम्मान मंदिर - Sri Kanchi Kamakshi Amman Temple


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एकम्बरनाथर मंदिर में दर्शन के बाद हम एक ऑटो रिक्शा से कामाक्षी अम्मान मंदिर पहुँच गए। मंदिर अब तक खुल चूका था और दर्शन के लिए काफी लोग भी जमा हो चुके थे । हम भी जल्दी से दर्शनों के लिए कामाक्षी अम्मान मंदिर में प्रवेश कर गए । मंदिर बाहर से भी सुन्दर दिखता है और अन्दर से बहुत भव्य बना हुआ है । इसकी भव्यता और साफ़ सफ़ाई से मालूम हो रहा था कि यह कांचीपुरम का एक समृद्ध मंदिर है। मंदिर के अन्दर दर्शनों के लिए लाइन लगी हुई थी और बिना समय गवाएँ हम भी लाइन में लग गए और थोड़ी देर बाद दर्शन के बाद मंदिर से वापिस बाहर आ गए। अब तक शाम के साढ़े चार बज चुके थे। आज ही हमें कांचीपुरम से 40 किलोमीटर दूर चिन्गालपट्टू रेलवे स्टेशन से शाम 6:50 पर रामेश्वरम के लिए ट्रेन पकड़नी थी इसलिए बिना समय गवाएँ हम ऑटो से बस स्टैंड चले गए। वहाँ पहुंचकर रेस्टोरेंट से अपना सामान लिया और चिन्गालपट्टू जाने के लिए बस पकड़ ली ।

कामाक्षी अम्मान मंदिर

Thursday, 17 May 2018

Lord Ekambaranathar Temple ( Ekambareeswarar Temple ), Kanchipuram

                    एकम्बरनाथर मंदिर ( एकाम्बरेश्वर मंदिर )

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वरदराज पेरुमाल मंदिर में दर्शन के बाद हम एक ऑटो रिक्शा से कामाक्षी अम्मान मंदिर पहुँच गए , लेकिन अभी मंदिर खुलने का समय नहीं हुआ था इसलिए मंदिर के प्रवेश द्वार अभी बंद ही थे । मालूम हुआ कि शाम को चार बजे ही मंदिर के द्वार खुलेंगे, उससे पहले किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं है। अब आधा घंटा यहाँ रूककर कर इंतजार करने से बेहतर था कि हम एकम्बरनाथर मंदिर चलें जाएँ और वापसी में यहाँ दर्शन करें । कामाक्षी अम्मान मंदिर से एकम्बरनाथर मंदिर की दुरी मुश्किल से एक किलोमीटर है । आप चाहे तो यहाँ से पैदल भी जा सकते हैं । रास्ते में ही श्रीकाची कामकोटी मठ भी है।

मंदिर का पनोरोमिक व्यू

Thursday, 10 May 2018

Kanchipuram-The Holy City

कांचीपुरम वरदराज पेरुमल मंदिर  ( Varadharaja Perumal Temple)

पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा की तिरुपति बाला जी के दर्शन के बाद वापिस तिरुपति आकर हम लोग देवी पद्मावती मंदिर में दर्शन करने चले गए । दर्शनों के बाद रात्रि 9 बजे के करीब हम अपने कमरे पर वापिस पहुँच गए । अब आगे  !!!

अगले दिन सुबह जल्दी से तैयार होकर लगभग 8:15 बजे तक तिरुपति के बस स्टैंड पर पहुँच गए। यहाँ से आज हमें कांचीपुरम जाना था जहाँ दिन भर मंदिर देखने के बाद शाम को कांचीपुरम से 40 किलोमीटर दूर चिंगालपट्टू रेलवे स्टेशन से हमें चेन्नई से आने वाली रामेश्वरम की ट्रेन पकड़नी थी। वैसे ट्रेन में मेरी बुकिंग चेन्नई से ही थी लेकिन चेन्नई जाकर वहाँ की बीच पर घूमने के बजाए मैंने भारत की सप्त पुरियों में से एक सांस्कृतिक नगर कांचीपुरम जाना ज्यादा बेहतर समझा। तिरुपति से  कांचीपुरम लगभग 110 किमी दूर है और हर 15 मिनट में बस उपलब्ध है । हमें भी जल्दी ही कांचीपुरम की बस मिल गयी और हम अपनी मंजिल की ओर रवाना हो गए ।

Thursday, 26 April 2018

Sri Padmavati Temple , Tiruchanur (Tirupati)

श्री पद्मावती मंदिर, तिरुचनूर
ॐ नमो भगवती पद्मावती सर्वजन मोहनी,
सर्व कार्य करनी, मम विकट संकट हरणी,
मम मनोरथ पूरणी, मम चिंता चूरणी नमों ।
ॐ ॐ पद्मावती नम स्वाहा: ।।

तिरुमला में दर्शन के बाद हम लोग बस से तिरुपति लौट आये । बस स्टैंड से हमने देवी पद्मावती मंदिर जाने के लिये ऑटो रिक्शा के बारे में पूछा लेकिन कोई भी 100 रूपये से कम में चलने को तैयार नहीं था । हम बस स्टैंड से बाहर आ गये और यहाँ से 60 रूपये में पद्मावती मंदिर जाने के लिये ऑटो रिक्शा मिल गया । मंदिर बस स्टैंड से लगभग पाँच किलोमीटर दूर है और लगभग 15 -20 मिनट में हम मंदिर पहुँच गए । मंदिर जाने के लिए सड़क पर ही एक भव्य गेट बना हुआ है ।

देवी पद्मावती 

Wednesday, 18 April 2018

Tirupati Bala ji: Adobe of Lord Venkateshwara

तिरुपति बालाजी 

वेंकटाद्रि समस्थानं ब्रह्माण्डे नास्ति किञ्चन। वेंकटेश समोदेवो न भूतो न भविष्यति
 ( वेंकटाद्री के समान पवित्र स्थान इस ब्रह्माण्ड में और कहीं नहीं है। श्री वेंकटेश्वर जी (बालाजी) के समान देवता इससे पहले न कभी कोई था और न ही होगा।)

पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा कि श्री मल्लिकार्जुन ज्योर्तिलिंग के दर्शन के बाद हम बस से करनूल पहुँच गए, जहाँ से रात को 9:50 की ट्रेन से तिरुपति के लिए रवाना हो गए । सारे दिन की भाग दौड़ से हम काफी थके हुए थे इसलिए अपनी बर्थ पर लेटते ही गहरी नींद आ गयी। अगले दिन सुबह ट्रेन अपने तय समय 6:40 से काफी पहले ही तिरुपति स्टेशन पर पहुँच गयी । तिरुपति स्तिथ अपनी कंपनी के गेस्ट हाउस में हमारी आज के लिए पहले से ही बुकिंग थी। वहाँ फोन कर वहाँ की लोकेशन ले ली और रेलवे स्टेशन से बाहर आकर एक ऑटो रिक्शा से गेस्ट हाउस चले गए । गेस्ट हाउस ज्यादा दूर नहीं था , वहाँ पहुँचने में 10 मिनट भी नहीं लगे। वहाँ पहुँचकर बिना समय गवाएँ ,नहा-धोकर जल्दी से तैयार हो गए और नाश्ता करने के बाद, एक छोटे बैग को छोड़कर सारा सामान वहीँ रख दिया और फिर ऑटो रिक्शा से सेंट्रल बस स्टैंड चले गए ।

Thursday, 12 April 2018

SRISAILAM – Abode of Lord Mallikarjun Swami and Bhramaramba Devi

श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्‌

हैदराबाद से निकलते- निकलते दोपहर के तीन बज चुके थे। हैदराबाद से 210  किमी दूर पर करनूल जिले में श्री शैल पर्वत पर स्थित श्री मल्लिकार्जुन ज्योर्तिलिंग और सिद्धशक्तिपीठ भ्रमरम्बा देवी का दिव्य धाम हमारी यात्रा का अगला पड़ाव था । सारे रास्ते सड़क ठीक ठाक बनी है ,काफी जगह फॉर लेन भी है फिर भी यहाँ तक पहुँचने में बस ने 6 घंटे लगा दिए। बस 2X2 डीलक्स थी, सीटें आरामदायक थी ,ज्यादा जगह रुकी भी नहीं ; सिर्फ एक जगह खाने पीने के लिए ही विश्राम लिया लेकिन धीमे चलने के कारण  मात्र 35 किमी / घंटे की ही औसत निकाल पाई। यदि इतना सफ़र हरियाणा रोडवेज में होता तो चार घंटे से भी कम समय लगता।