Friday, 26 June 2020

Ancient Shiv Temple - Lakhamandal

                                    शिव मंदिर लाखामंडल

पिछले वर्ष जून के महीने लगभग इन्ही दिनों सपरिवार यमुनोत्री –गंगोत्री जाने का प्रोग्राम बना । मैं तो पहले भी एक बार यमुनोत्री – गंगोत्री जा चूका था लेकिन परिवार के साथ इन स्थानों पर यह मेरी पहली यात्रा थी । 2018 की गर्मियों में जब परिवार के साथ बद्रीनाथ जी की यात्रा की थी, तब बच्चे वहाँ जाकर बड़े खुश हुए थे । बड़े –बड़े पहाड़ों, गहरी घाटियों ,सड़क के साथ बहती नदी , जगह-जगह बहते झरने को एकदम पास से देखना उनके लिए बेहद रोमांचकारी था। पूरे सफ़र का सबने खूब आनंद लिया था । ये सब इस सफ़र में भी फिर से देखेंगे , यही सोचकर सभी बेहद उत्साहित थे ।

[लाखामंडल मंदिर]
लाखामंडल मंदिर

                                                                   

Monday, 9 December 2019

Trek to Mysterious Khait Parvat



रहस्यों से भरा उत्तराखंड का खैट पर्वत 

परियों की कहानियां बचपन में तो आपने जरूरी पढ़ी और सुनी होगी। इंसानों से इनके प्रेम के किस्से भी पहाड़ों पर खूब सुनाए जाते हैं। किस्सों की दुनिया से आगे निकलते हुए एक ऐसी जगह की ओर चलते हैं जहां आज भी लोग परियों और वनदेवियों को देखने का दावा करते हैं।मैं बात कर रहा हूँ टिहरी जिले में स्थित खैट पर्वत के शिखर पर मौजूद खैटखाल नाम के मंदिर की । इसकी जानकारी मुझे लगभग एक साल पहले एक टीवी प्रोग्राम से हुई । न्यूज़ 18 चैनल के एक प्रोग्राम “आधी हकीकत आधा फ़साना” में भी इसके बारे विस्तार से दिखाया गया था ,जिसे आप इस लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं । 

खैटखाल मंदिर

Wednesday, 31 July 2019

Sarnath - The Land of Buddha

सारनाथ
कल बनारस घूमने में काफी भाग दौड़ हुई थी। काशी विश्वनाथ से काल भैरव फिर BHU ,तुलसी मानस ,संकट मोचन ,वैष्णो माता मंदिर आदि-आदि और आखिर में रात को गँगा आरती । रात को कमरे पर वापिस आने और खा पीकर सोने में काफी लेट भी हो चुके थे इसलिए आज सुबह हम सब आराम से उठे । आज शाम को हमारी अम्बाला के लिए वापसी की ट्रेन थी लेकिन उससे पहले आज सुबह हम सारनाथ जाना चाहते थे। सारनाथ, बनारस से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर है । भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश यहीं दिया था । यहाँ महात्मा बुद्ध को समर्पित कई मंदिर हैं जिन्हें आप आधा दिन में आराम से घूम सकते हैं । सुबह नाश्ते का काम निपटा कर अपना सारा सामान पैक किया ताकि बाद में वापिस आने पर समय न लगे । सारा सामान लेकर केयर टेकर के पास जमा करवा दिया और रूम खाली कर दिया । गेस्ट हाउस से बाहर आकर सारनाथ जाने के लिए एक ऑटो बुक कर लिया और लगभग आधे घंटे की यात्रा के बाद हम सारनाथ पहुँच गए ।

भगवान बुद्ध 

Friday, 12 July 2019

Famous temples in Varanasi


वाराणसी के प्रसिद्ध मंदिर :
बाबा विश्वनाथ और माँ अन्नपूर्णा के दर्शन और नाव से काशी के घाटों पर घूमते-2 दोपहर के 1 बज गए थे । इसके बाद हम वाराणसी के अन्य प्रमुख मंदिरों में घूमना चाहते थे और चूँकि अधिकतर मंदिर दोपहर को बंद हो जाते हैं तो हमारी कोशिश थी बंद होने से पहले कम से कम एक –दो मंदिर तो देख ही लें । वैसे तो काशी में इस समय लगभग 1500 मंदिर हैं, जिनमें से बहुतों की परंपरा इतिहास के विविध कालों से जुड़ी हुई है। इनमें से कुछ जैसे विश्वनाथ, संकटमोचन, काल भैरव, विश्वविद्यालय के प्रांगण में स्थित नया विश्वनाथ मंदिर ,तुलसी मानस और दुर्गा माता के मंदिर भारत भर में प्रसिद्ध हैं।

त्रिदेव मंदिर

Friday, 28 June 2019

Kashi Vishwanath Temple - Varanasi


काशी विश्वनाथ मंदिर- वाराणसी

दिसम्बर 2014 का आख़िरी सप्ताह, रात के 11-12 बजे का समय । कड़ाके की ठण्ड के बीच सर्द कोहरे  और शीत लहर में ठिठुरते मैं और मेरा दोस्त सुशील मल्होत्रा , अम्बाला रेलवे स्टेशन पर, बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी जाने के लिए बेगमपुरा एक्सप्रेस का इन्तजार कर रहे थे । साथी तो हमारे साथ एक और भी था लेकिन वो मजे से खराटे मारते हुए सो रहा था। वो समझदार ,घर से ही ठण्ड से बचने और अच्छी नींद के लिए बूढ़े साधू की “दो-तीन खुराक” लेकर आया था । अपने साथी को दीन-दुनिया से बेख़बर, छोटे-बड़े ,ऊँचे-नीचे बैगों के बिस्तर पर निश्चिन्तता से सोते देखकर उसकी ली हुई “खुराक” के प्रति मेरे मन में श्रद्धा का भाव जागृत हो रहा था। इस खुराक को आज तक हेय दृष्टि से देखने वाला मन आज केजरीवाल बन रहा था ,मतलब यू टर्न ले रहा था । मन ही मन सोच रहा था कि बूढ़े साधू की कृपा से मुझे भी आज एक खुराक मिल जाये तो अच्छी नींद आ जाये लेकिन हमारे भाग्य में आज सिर्फ़ चाय की खुराक ही लिखी थी ।
 

Thursday, 16 May 2019

Manikaran - Himachal

मणिकर्ण- MANIKARAN
खीर गंगा ट्रैक  से वापिस बरशैणी पहुँचते-2 शाम के 6 बज चुके थे । आज 20 किलोमीटर से ज्यादा आना – जाना हो गया था इसलिए हम सभी काफी थके हुए थे। एक दुकान में हल्का खाना-पीना किया और फिर अपनी गाड़ी में सवार हो मणिकर्ण की तरफ़ चल दिए । 

श्रीरघुनाथ मंदिर, नैना भगवती मंदिर और श्री राम मंदिर एक साथ

Wednesday, 8 May 2019

Trek to Kheer Ganga


खीर गंगा ट्रैक, हिमाचल

नवम्बर-2018 में हिमाचल में शिकारी देवी और कमरुनाग ट्रैक पर जाने के बाद पिछले 4-5 महीनो में हिमालय जाने का कोई प्रोग्राम नहीं बन पाया। इस दौरान तीन यात्रायें तो हुई लेकिन सभी मैदानी इलाकों में ,इसीलिए फिर से हिमालय जाने की बड़ी इच्छा हो रही थी । काफी जगह दिमाग में आई जिसमे हिमाचल में चुडधार और करेरी लेक मुख्य थी ,लेकिन इस वर्ष ज्यादा बर्फ़बारी होने से इन जगह पर जाना अभी भी मुमकिन नहीं था। आख़िरकार हिमाचल के खीर गंगा ट्रैक पर चलने का फाइनल हुआ। मेरे साथ सुशील और सुखविंदर जाने वाले थे । इसी फरवरी में की गयी प्रयाग राज कुम्भ और अयोध्या यात्रा में भी ये दोनों साथ ही थे।  18 अप्रैल को सुबह निकलने का फाइनल किया और तय दिन सुबह 8:30 बजे हम तीनो अम्बाला से हिमाचल की ओर निकल पड़े।

खीरगंगा

Thursday, 25 April 2019

A journey to Ayodhya -The Holy City

राम जन्मभूमि अयोध्या

पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा कि प्रयागराज कुम्भ में स्नान करने और दो दिन बिताने के बाद अगले दिन सुबह जल्दी से उठकर सब तैयार हो गए। आज हमें राम लल्ला के दर्शन हेतु राम जन्म भूमि अयोध्या जाना था । प्रयागराज से अयोध्या की सड़क मार्ग से दुरी लगभग 170 किमी है और लगभग पाँच घंटे सफ़र में लग ही जाते हैं, इसलिये सुबह-सुबह ही डाक्टर साहब से विदा ली और बस स्टैंड के लिए रवाना हो गए । कुम्भ क्षेत्र से ही हमें बस स्टैंड जाने के लिए एक ऑटो रिक्शा मिल गया और हम 15-20 मिनट में बस स्टैंड पहुँच गए । बस स्टैंड पहुँचकर सबसे पहले नाश्ते का काम निपटाया और फिर अयोध्या जाने वाली बस में सब सवार हो गए ।

तुलसी चौरा

Monday, 15 April 2019

Prayagraj Kumbh Mela 2019 : The Sacred Fair

प्रयागराज कुम्भ यात्रा-2019
आस्था, विश्वास, सौहार्द एवं संस्कृतियों के मिलन का पर्व है “कुम्भ”। ज्ञान, चेतना और उसका परस्पर मंथन कुम्भ मेले का वो आयाम है जो आदि काल से ही हिन्दू धर्मावलम्बियों की जागृत चेतना को बिना किसी आमन्त्रण के खींच कर ले आता है। कुम्भ पर्व किसी इतिहास निर्माण के दृष्टिकोण से नहीं शुरू हुआ था अपितु इसका इतिहास समय द्वारा स्वयं ही बना दिया गया। वैसे भी धार्मिक परम्पराएं हमेशा आस्था एवं विश्वास के आधार पर टिकती हैं न कि इतिहास पर। यह कहा जा सकता है कि कुम्भ जैसा विशालतम् मेला संस्कृतियों को एक सूत्र में बांधे रखने के लिए ही आयोजित होता है। किसी उत्सव के आयोजन में भारी जनसम्पर्क अभियान, प्रोन्नयन गतिविधियां और अतिथियों को आमंत्रण प्रेषित किये जाने की आवश्यकता होती है, जबकि कुंभ विश्व में एक ऐसा पर्व है जहाँ कोई आमंत्रण अपेक्षित नहीं होता है तथापि करोड़ों तीर्थयात्री इस पवित्र पर्व को मनाने के लिये एकत्र होते हैं।
 

Wednesday, 30 January 2019

Trek to Kamrunag Lake, Rohanda


कमरुनाग यात्रा- हिमाचल
पिछली पोस्ट : शिकारी देवी

शिकारी देवी की यात्रा के बाद हम लोग वापिस जन्जैहली आ गए और बिना रुके  थुनाग, बगस्याड और कांडा होते हुए चैल-चौक पहुँच गए । यहाँ एक टी-ब्रेक के बाद अपनी अगली मंजिल रोहांडा की तरफ चल दिए। चैल-चौक से रोहांडा लगभग 28 किलोमीटर दूर है और सड़क शानदार बनी हुई है । शाम लगभग 4:30 बजे हम रोहांडा पहुँच गये । रोहांडा एक छोटा सा गाँव है और सुंदरनगर से करसोग आने- जाने वाली बसों का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है । कार एक साइड में खड़ी कर हम जगह का जायजा करने के लिए नीचे उतर आये । दायें हाथ पर ऊपर की तरफ मुझे एक फारेस्ट गेस्ट हाउस का बोर्ड दिखाई दिया। अभी कुछ सप्ताह पहले ही हम दोनों चकराता के पास घने वन के बीचों-बीच एक शानदार लोकेशन पर बने बुधेर फारेस्ट हाउस में रुके थे इसलिए फारेस्ट हाउस का बोर्ड देखकर कदम रुक नहीं पाए और मैं उस तरफ कमरे के बारे में पूछने के लिए चल दिया और सुखविंदर सामने गुप्ता ढाबे की तरफ सिगरेट की तलाश में।

देव कमरुनाग मंदिर

Tuesday, 22 January 2019

Shikari Devi Yatra - Himachal

शिकारी माता और कमरुनाग यात्रा- हिमाचल
शिकारी माता यात्रा :
पिछले वर्ष (2018) नवम्बर में हिमाचल घुमने का प्रोग्राम बना । इच्छा तो शुरू से चुडधार जाने की थी लेकिन नवम्बर के शुरू में ही वहाँ बर्फ़बारी हो जाने से वहाँ की यात्रा इस समय मुमकिन नहीं थी । चुडधार में ऊपर मंदिर में और रास्ते में रुकने और खाने-पीने की सब व्यवस्था बंद हो चुकी थी और अब हम ठहरे देसी घुमक्कड़ ! हमारे पास न तो रुकने के लिए अपने टेंट हैं , न ही स्लीपिंग बैग। इसलिए वहाँ जाना स्थगित कर हिमाचल के ही मंडी जिला में स्तिथ शिकारी देवी और कमरूनाग जाने का फाइनल कर लिया। यात्रा के लिए दो साथी भी तैयार हो गए ,एक तो मेरी यात्राओं के लगभग स्थायी साथी ,मेरे सहकर्मी सुखविंदर सिंह और दुसरे हरीश गुप्ता । 21 नवम्बर सुबह 8 बजे निकलना निश्चित हो गया ।

SHIKARI DEVI Temple

Thursday, 27 December 2018

Trip to Chakrata and Budher Forest

चकराता  और बुधेर फारेस्ट हाउस की यात्रा
घूमने-फिरने की जब भी बात आती है तो हर किसी के मन में पहला ख्याल पहाड़ों की तरफ ही जाता है। मेरा भी इस वर्ष सितम्बर में चकराता जाने का प्रोग्राम अचानक बना । इससे पहले भी एक- दो बार प्रोग्राम बना था लेकिन सिरे नहीं चढ़ पाया । असल में चकराता हमारे अम्बाला से ज्यादा दूर नहीं, मात्र 180 किलोमीटर दूर है ,तो यही सोचते थे अरे ये तो पास ही है कभी भी चले जायेंगे ।लेकिन इस कभी भी के चक्कर में काफी समय निकल गया। इस बार 21 सितम्बर को मुहर्रम की छुट्टी थी और 23 को रविवार की ।22 की छुट्टी लेकर तीन दिन का बढ़िया प्रोग्राम बना लिया । प्रोगाम के अनुसार हमें चकराता, उन्दावा वन , मोइला टॉप और टाइगर फॉल देखना था । चूँकि हम दो ही लोग थे –मैं और मेरा मित्र सुखविंदर –तो गाड़ी से चलने की बजे बाइक पर ही चलने का निश्चय किया । हमारी एक साथ यह चौथी बाइक यात्रा थी ।सबसे पहले 2015 में चोपता –तुंगनाथ और देवरिया ताल गए थे , फिर 2016 में बाइक पर हिमाचल में पराशर लेक और बिजली महादेव की यात्रा की। 2017 में कोटद्वार , लैंसडौन , द्वारीखाल और बर्सुड़ी की यात्रा की थी। 

Wednesday, 5 December 2018

Gujrat Yatra : Ahmedabad and Gandhinagar sight seeing

                              गुजरात यात्रा : अहमदाबाद -गांधीनगर 
पिछली पोस्ट : सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर  

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के उपरांत रात को वेरावल से चलकर अगले दिन सुबह अहमदाबाद पहुँच गये । प्लेटफॉर्म पर बने विश्रामालय के स्नानघर में pay एंड use सुविधा का उपयोग कर, नहा-धोकर तैयार हो गए और फिर नाश्ते से निपट के अहमदाबाद घूमने के लिए तैयार हो गए । एक छोटा पिट्ठू बैग छोड़  बाकि सारा सामान स्टेशन पर ही क्लॉक रूम में जमा करवा दिया और स्टेशन से बाहर आ गए । स्टेशन से बाहर निकलते ही टैक्सी चालकों और ऑटो रिक्शा वालों ने घेर लिया । सभी अहमदाबाद/गाँधी नगर घूमाने के पैकेज बेच रहे थे ।

साबरमती रिवर फ्रंट

Wednesday, 24 October 2018

Gujrat Yatra : Somnath Jyotirling Temple

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर  ( Somnath Jyotirling Temple )

पिछली पोस्ट में आप पढ़ चुके हैं कि नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद हम गोपी तालाब और भेट द्वारका गए ।वहाँ से दोपहर तक वापिस द्वारका लौट आये और शाम को द्वारका के स्थानीय मंदिरों में दर्शन किये और फिर रात की ट्रेन से सोमनाथ के लिए रवाना हो गए। अब उससे आगे ....

द्वारका से सोमनाथ के लिए एक ही ट्रेन है जो द्वारका से रात 8:30 चल कर अगले दिन सुबह 5:00 बजे सोमनाथ पहुँच जाती है । सोमनाथ इस रूट पर आखिरी रेलवे स्टेशन है । हमारी ट्रेन समय से पहले ही सोमनाथ पहुँच गयी थी । बाहर अभी दिन का उजाला नहीं हुआ था, थोडा अँधेरा ही था । वैसे भी भारत के धुर पश्चिमी किनारे पर होने के कारण यहाँ सूर्योदय लेट ही होता है । सोमनाथ स्टेशन के पूरे प्लेटफ़ॉर्म पर मछली से भरे हुए बड़े बड़े डिब्बे पड़े हुए थे । जिसके कारण रेलवे स्टेशन पर मछली की जबरदस्त दुर्गंध थी। हम जल्दी से स्टेशन से बाहर निकले और हमें कई गेस्ट हाउस वालों ने ‘कमरा चाहिए –कमरा चाहिए ‘ कहते हुए घेर लिया। बड़ी मुश्किल से उनसे पीछा छुड़ाया । एक पंडित जी भी अपनी बाइक पर घूमते हुए अपना कमरा देने के लिए ग्राहक खोज रहे थे, अब वो चिपक गए । बोले कमरा देख लो ,पसंद आये तो लेना , नहीं तो मत लेना । हमने एक रिक्सा किया और उस पंडित के पीछे पीछे उसके घर पहुँच गए । उसने अपने घर के ही दो कमरे यात्रियों के लिए छोड़े हुए थे । कमरा ठीक ठाक था । ज्यादा अच्छा भी नहीं और बुरा भी नहीं । कमरा मंदिर के काफी नजदीक था और हमें शाम तक ही चाहिए था इसलिए हमने वही पसंद कर लिया। किराया भी शायद 400 रूपये था ।

सोमनाथ मंदिर

Tuesday, 16 October 2018

Mata Baglamukhi Temple

माता बगलामुखी (Mata Baglamukhi Temple)
माता चामुण्डा देवी के मंदिर में दर्शन के बाद हम लोग बैजनाथ चले गए । मंदिर में दर्शनों के बाद रात्रि विश्राम वहीँ एक होटल में किया । सुबह उठकर दोबारा मंदिर में दर्शन के लिए चले गए और फिर वहां से दोबारा चामुंडा होते हुए सीधा धर्मशाला और फिर मैकडोनल्ड गंज पहुँच गए । वहाँ पर प्रसिद्ध बौद्ध मंदिर गए। बाबा बैजनाथ और मैकडोनल्ड गंज पर बाद में लिखूंगा , अभी नवरात्रे में आपको माता के अलग अलग सिद्ध स्थानों पर लेकर चलूँगा । 

धर्मशाला से वापसी में सीधा माता चिंतपूर्णी वाली सड़क पर चल दिए । ज्वाला जी मंदिर से कुछ किलोमीटर पहले रानीताल के पास से एक तिराहा है । इस तिराहे से एक सड़क दायीं और जा रही है जो सीधा माता चिंतपूर्णी को चली जाती है, इस जगह से कुछ किलोमीटर आगे मुख्य सड़क पर ही माँ बगलामुखी का बड़ा प्रसिद्ध मंदिर है। पहाड़ी इलाका होने के कारण मंदिर सड़क से नीचे है । सड़क पर मुख्य द्वार है यहाँ से नीचे सीडियां उतर कर ही मंदिर में जाया जाता है ।
 

Wednesday, 10 October 2018

Gujrat Yatra : Nageshwar Jyotirlinga Temple

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर  ( Nageshwar Jyotirling Temple )

पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा कि रुक्मिणी देवी मंदिर, गोपी तालाब और बेट-द्वारका के दर्शन के साथ हमने नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन भी किये थे । रुक्मिणी देवी मंदिर के बाद बस का दूसरा पड़ाव नागेश्वर ज्योतिर्लिंग ही था । पिछली पोस्ट में ही इसके बारे लिखता तो पोस्ट बहुत लम्बी हो जाती इसलिए इसे अलग से इस पोस्ट में लिख रहा हूँ ।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग परिसर में विशाल शिव मूर्ति

Friday, 5 October 2018

Gujrat Yatra : Temples in and around Dwarka

रुक्मिणी देवी मंदिर, गोपी तालाब और बेट-द्वारका ( Rukmini Devi Temple, Gopi Talab and Bet Dwarka )


अगले दिन सुबह जल्दी से तैयार होकर , आठ बजे से पहले ही हम भद्रकाली चौक पहुँच गए । बस में कुछ सवारियाँ पहले ही आ चुकी थी । कुछ ही देर में जब सभी लोग आ गए तो बस चल पड़ी । आज ये हमें रुक्मणि मंदिर , नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, गोपी तालाब तथा बेट द्वारका लेकर जाने वाली थी । शहर से थोड़ा बाहर निकलते ही पहला पड़ाव आ गया । बस का परिचालक - गाइड और निर्देशक दोनों का काम कर रहा था । उसने बताया कि हम रुक्मणी देवी मंदिर पहुँच चुके हैं । उसने हमें मंदिर में जल्दी से जाकर दर्शन करने और आधे घंटे में बस पर वापिस आने को कहा और फिर बस से नीचे उतर कर, सभी सवारियों के साथ गाइड के रूप में मंदिर की तरफ चल दिया । हमारी बस के साथ ही दो तीन बसें और वहाँ पहुँच जाने से मंदिर में एकदम से भीड़ बढ़ गयी थी फिर भी लगभग आधे घंटे में दर्शन के बाद हम लोग वापिस बस में आ गए ।

रुक्मिणी देवी मंदिर 

Friday, 28 September 2018

Gujrat Yatra : Dwarkadhish Temple - Dwarka

गुजरात यात्रा – द्वारिकाधीश मंदिर, द्वारका

मेघश्यामं पीतकौशेयवासं श्रीवत्साङ्कं कौस्तुभोद्भासिताङ्गम् ।
पुण्योपेतं पुण्डरीकायताक्षं विष्णुं वन्दे सर्वलोकैकनाथम् ॥
मेघ समान रंग वाले, पीले रेशमी पीताम्बर धारण किए, श्रीवत्स के चिह्नवाले, कौस्तुभमणि से सुशोभित अंग वाले, पुण्य करने वाले, कमल समान लंबी आंख वाले सर्वलोक के एकमात्र स्वामी भगवान श्रीद्वारकाधीश भगवान श्रीकृष्ण को मैं नमस्कार करता हूँ ।

Dwarkadhish Temple

Saturday, 15 September 2018

Gangotri Yatra : Gangotri Dham and Vishwanath Temple Uttarkashi

                    यमुनोत्री – गंगोत्री यात्रा ( Gangotri Temple )

गंगोत्री यात्रा -2 :
पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा कि सुबह 6 बजे उत्तरकाशी से बस पकड़ गंगोरी, भटवारी, गंगनानी और फिर हर्षिल ,लंका और भैरों घाटी होते हुए लगभग 6 घंटे की यात्रा के बाद मैं 12 बजे गंगोत्री पहुँच गया । अब उससे आगे …..

गंगोत्री पहुँचते ही बस के परिचालक ने घोषणा कर दी कि यही बस दोपहर 2:00 बजे यहाँ से उत्तरकाशी वापिस जाएगी जिसको वापिस जाना हो 2:00 बजे तक बस में सवार हो जाये । मंदिर में दर्शन और पूजा पाठ के लिए दो घंटे कम नहीं थे । बस पार्किंग से गंगोत्री का मंदिर लगभग 300 मीटर दूर है,10-12 फीट चौड़ा रास्ता है और रास्ते के दोनों तरफ एक छोटा सा बाजार है जहाँ खाने पीने की दुकाने और पूजा सामग्री का सामान मिलता है।

Gangotri Temple

Tuesday, 11 September 2018

Gangotri Yatra - Part 1 : Uttarkashi to Gangtori

यमुनोत्री – गंगोत्री यात्रा ( Gangotri Yatra )


गंगोत्री यात्रा -1

पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा कि सुबह 6 बजे जानकी चट्टी से निकल कर ट्रेक करते हुए 9 बजे यमुनोत्री पहुँच गए। मंदिर में दर्शन के बाद जानकी चट्टी वापसी की ,वहाँ से जीप द्वारा बडकोट वापिस आये और फ़िर शाम चार बजे बडकोट से उत्तरकाशी की बस पकड ली। अब उससे आगे …..

बडकोट से उत्तरकाशी का रास्ता बेहद खूबसूरत है । कोटद्वार वाले रास्ते की याद आ गयी । सड़क के दोनों तरफ चीड़ का घना जंगल है । जब सड़क के किनारे लम्बे- लम्बे चीड़ के पेड़ खड़े हों तो ये एक सुन्दर मनभावन दृश्य तो उत्पन्न करते ही हैं , खाई और सड़क के बीच में एक दीवार का काम करते हुए मन में एक सुरक्षा का भाव भी कराते हैं। रास्ते में कई छोटे -2 गाँव पड़ते हैं , शाम का समय था , नौकरी पेशा लोग छुट्टी के बाद बस का इंतजार करते हुए खड़े मिलते । बस सभी जगह रूकती , कुछ सवारी चढ़ती , कुछ उतरती बस फिर आगे अपनी मंजिल की और चल पड़ती । सफ़र बढ़िया कट रहा था लेकिन धरासू पहुंचकर मेरे साथ एक मजेदार-यादगार किस्सा घटित हुआ ।

हर्षिल और भगीरथी